उदयपुर नगर निगम के 272 प्लॉट के बहुचर्चित घोटाले मामले में गिरफ्तार पूर्व जिला अल्पसंख्यक अधिकारी हेमलता कांकरिया और उनके पति निरंजन मोगरा को राजस्थान हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर की एकलपीठ के न्यायाधीश सुनील बेनीवाल ने दोनों की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें 50-50 हजार रुपए के निजी मुचलके और 25-25 हजार रुपए की दो जमानतों पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास बालिया ने दलील दी कि हेमलता और उनके पति दोनों वरिष्ठ नागरिक हैं। 10 अगस्त 2026 से जेल में है। इसके साथ ही मामले के अन्य सह-आरोपी सुमित्रा देवी, राजदीप और दीपक को कोर्ट पहले ही जमानत दे चुकी है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माना कि मामला लंबा चलने की संभावना है और आरोपियों के फरार होने का कोई अंदेशा नहीं है, इसलिए उन्हें जमानत पर रिहा किया जाता है। जोधपुर स्थित घर से हुई थी गिरफ्तारी, मिला था सोना और कैश इससे पहले स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की टीम ने पूर्व जिला अल्पसंख्यक अधिकारी हेमलता कांकरिया और उनके पति निरंजन मोगरा को जोधपुर स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया था। कार्रवाई के दौरान टीम ने इनके आवास से करीब 2 किलो सोने के जेवर और 11 लाख रुपए नकद बरामद किए थे। एसओजी की टीम बेनामी संपत्ति और बड़े वित्तीय लेन-देन के नेटवर्क को लेकर पड़ताल कर रही है। इस पूरे घोटाले में एसओजी अब तक कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। फर्जी दस्तावेज बनाकर 50 लाख में बेचा था निगम का प्लॉट जानकारी के अनुसार 272 प्लॉटों के घोटाले को लेकर सूरजपोल थाने में साल 2022 में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से हिरण मगरी सेक्टर-11 स्थित निगम के 546 नंबर प्लॉट के फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए थे। इसके बाद फर्जी व्यक्ति किशन पटेल के नाम से निगम में लीजडीड और नामांतरण पत्र जारी करवा लिए गए। कागजात तैयार होने के बाद इस भूखंड को सलूंबर निवासी अनिल कचौरिया को 50.01 लाख रुपए में बेच दिया गया था। बैंक खातों से हुआ था रकम का ट्रांसफर मामले की कड़ियां जोड़ते हुए एसओजी ने आरोपी राजेंद्र धाकड़ को गिरफ्तार किया था।पूछताछ में पता चला कि राजेंद्र ने एकलव्य बस्ती मल्लातलाई निवासी किशनलाल गमेती के बैंक खाते में 7 लाख रुपए जमा कराए थे। किशनलाल ने यह राशि निकालकर किशन मारवाड़ी और राकेश सोलंकी को दी थी, जिसके बाद यह पैसा विक्रम ताकड़िया तक पहुंचाया गया था। यूडीए की खाली जमीनों पर हुआ था फर्जीवाड़ा दरअसल, यूडीए ने साल 2012 में कुछ कॉलोनियां नगर निगम को सौंपी थीं। इनमें कई भूखंड खाली और कॉर्नर के थे। देखरेख न होने के चलते लोगों ने इन पर अवैध कब्जे कर लिए। इसके बाद फर्जी दस्तावेज तैयार कर नामांतरण खुलवाए गए और जमीनों को दलालों के जरिए बेच दिया गया। इस मुद्दे को सबसे पहले साल 2022 में कांग्रेस पार्षद अजय पोरवाल ने उठाया था, जिसके बाद 48 पट्टे निरस्त किए गए थे। इसके बाद पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया और वर्तमान शहर विधायक ताराचंद जैन ने भी इसे 500 करोड़ का बड़ा घोटाला बताते हुए जांच की मांग उठाई थी। एसओजी अप्रैल 2022 से इस मामले की लगातार जांच कर रही है।