उदयपुर में 2 करोड़ रुपए की रिश्वत के मामले में पकड़े गए एसओजी के एएसपी मुकेश सोनी और दलाल सज्जन सिंह ने खुद की आवाज का सैम्पल देने से इंकार कर दिया है। जांच अधिकारी और एसीबी के एडिशनल एसपी महावीर सिंह ने बताया कि दोनों को बुधवार को उदयपुर की एनआई एक्ट कोर्ट-4 में पेश किया गया। इस दौरान सैम्पल लेने के लिए फोरेंसिक टीम भी मौजूद थी। लेकिन एएसपी और दलाल दोनों ने कोर्ट के समक्ष अपना वॉइस सैम्पल देने से मना कर दिया। परिवादी निरंजन मोगरा का वॉइज सैम्पल पूर्व में लिया जा चुका है। बता दें, एसीबी के पास रिश्वत की डील से जुड़ी ऑडियो रिकॉर्डिंग से एएसपी और दलाल की आवाज का मिलान करने के लिए सैम्पल लिए जाने थे। ताकि कानूनी रूप से सबूत के तौर पर ये साबित हो सके कि रिकॉडिंग में आवाज इनकी ही है। 18 दिन से फरार SOG के रीडर को पकड़ने में नाकाम पुलिस-एसीबी इस रिश्वत कांड के बाद से एसओजी कार्यालय का रीडर जसवंत सिंह राव 18 दिन से फरार है। एसीबी और उदयपुर पुलिस जसवंत को पकड़ने में नाकाम दिख रही है। ​अभी तक उसका कोई सुराग नहीं लगा है। मामले में एसीबी एएसपी महावीर सिंह ने बताया​ कि रीडर के घर सहित अन्य संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई, लेकिन वह नहीं मिला। लगातार उसे पकड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। बता दें, रीडर के पकड़े जाने के मामले में और भी खुलासे होने की संभावना है। 272 प्लॉट घोटाला मामले में एफआर लगाने की एवज में मांगी थी रिश्वत जानकारी अनुसार, एसीबी ने 27 अक्टूबर 2026 को दलाल सज्जनसिंह को एएसपी मुकेश कुमार सोनी के लिए 2 करोड़ की रिश्वत लेते हुए ट्रेप किया था। बाद में एएसपी सोनी को उनके बालोतरा स्थित घर से गिरफ्तार किया था। उदयपुर के चर्चित 272 प्लॉट घोटाला मामले में एफआर लगाने और जब्त सामान छोड़ने की एवज में रिश्वत मांगी गई थी। रिश्वत की डील फतहसागर झील किनारे रानी रोड पर हुई थी। जब दलाल सज्ज्नसिंह परिवादी निरंजन मोगरा को अपनी कार में लेकर रानी रोड पहुंचा था। जहां एएसपी सोनी अपने मित्र की निजी कार में पहुंचा था। परिवादी का आरोप था कि एएसपी सोनी ने खुद की मोबाइल स्क्रीन पर 2 करोड़ लिखकर रिश्वत की मांग की थी।