उदयपुर में रेल नेटवर्क को मजबूत के लिए उमरड़ा से देबारी के बीच 24.78 किलोमीटर लंबे रेलवे ट्रैक को अब डबल किया जाएगा। भारतीय रेलवे इस दूसरी लाइन को बिछाने पर 492 करोड़ रुपए खर्च करेगा। इसके लिए केंद्र सरकार ने 5 अक्टूबर को जमीन लेने की आखिरी मंजूरी दे दी है। अब यह जमीन बिना किसी रुकावट के सीधे केंद्र सरकार के पास आ गई है और जल्द ही मौके पर काम शुरू होगा। उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत ने बताया कि इस लाइन के डबल होने से लेकसिटी और आस-पास के इलाकों को फास्ट रेलवे नेटवर्क मिलेगा। इससे उदयपुर का जयपुर और अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों से सीधा और तेज जुड़ाव हो जाएगा। ट्रैक की क्षमता बढ़ने से इस रूट पर ज्यादा ट्रेनें चलाई जा सकेंगी और ट्रेनों की रफ्तार भी बढ़ेगी। सांसद रावत ने बताया कि अभी तक सिंगल ट्रैक होने की वजह से एक ट्रेन को निकालने के लिए दूसरी ट्रेन को आउटर या स्टेशन पर रोकना पड़ता था। अब दो ट्रैक बनने से शहर के बीच से एक साथ दो ट्रेनें बिना रुके आसानी से गुजर सकेंगी। इससे ट्रेनों की लेटलतीफी खत्म होगी और वे बिल्कुल समय पर चलेंगी, जिससे रोजाना सफर करने वाले हजारों यात्रियों का समय बचेगा। इस रेल मार्ग के डबल होने से उदयपुर और चित्तौड़गढ़ में टूरिज्म को काफी बढ़ावा मिलेगा। देश-दुनिया से आने वाले सैलानियों के लिए सफर आसान हो जाएगा। इसके साथ ही भीलवाड़ा के कपड़ा उद्योग और चित्तौड़गढ़ के आस-पास मौजूद सीमेंट फैक्ट्रियों को भी माल ढुलाई और बेहतर कनेक्टिविटी का सीधा फायदा मिलेगा। व्यापार और उद्योग बढ़ने से इलाके के युवाओं के लिए रोजगार के नए मौके भी तैयार होंगे। जमीन लेने से पहले सरकार ने 1 जून को रेलवे के नियमों के तहत एक शुरुआती नोटिस जारी किया था। उस दौरान इस प्रोजेक्ट को लेकर लोगों से आपत्तियां मांगी गई थीं, जिसमें कुल 6 आपत्तियां सामने आईं। मामले से जुड़े जिम्मेदार अधिकारी ने इन सभी 6 आपत्तियों पर बारीकी से सुनवाई और जांच-पड़ताल की। सुनवाई के बाद अधिकारी ने सभी आपत्तियों को खारिज कर दिया और अपनी फाइनल रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप दी। रिपोर्ट मिलने के बाद रेल मंत्रालय ने जमीन लेने का आखिरी ऐलान कर दिया है, जिससे अब इस प्रोजेक्ट की सारी कानूनी अड़चनें खत्म हो गई हैं।