उदयपुर में सोमवार और मंगलवार को जिला परिषद चुनाव में नामांकन का आखिरी दिन है। इस बार जिला प्रमुख की सीट अनारक्षित ओपन होने से कई बड़े नेता जिला परिषद् सदस्य का चुनाव लड़ सकते हैं। विधायक का चुनाव लड़ चुके बीजेपी नेता हिम्मत सिंह झाला और कृष्णगोपाल पालीवाल भी इस दौड़ में हैं, तो वहीं बीजेपी देहात के जिलाध्यक्ष पुष्कर तेली भी जोर आजमाइश कर रहे हैं। हालांकि, तेली अपने गृह इलाके की सायरा सीट के बजाय किसी और सेफ सीट से चुनाव लड़ना चाह रहे हैं। वहीं कांग्रेस से भी पूर्व जिलाध्यक्ष लाल सिंह झाला, राजसिंह झाला और विवेक कटारा मैदान में उतर सकते हैं। जिला प्रमुख की रेस में झाला, पालीवाल और तेली के अलावा भी कई नेता वल्लभनगर से बीजेपी नेता हिम्मतसिंह झाला और मावली से कृष्णगोपाल पालीवाल विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि दोनों को हार का सामना करना पड़ा। जबकि देहात जिलाध्यक्ष तेली उप जिला प्रमुख और गोगुंदा प्रधान रह चुके हैं। बीजेपी से बोर्ड बनने की स्थिति में जिला प्रमुख बनने रेस में झाला, पालीवाल और तेली के अलावा के कई नेता और भी है। पूर्व देहात जिलाध्यक्ष चन्द्रगुप्त सिंह चौहान, भंवर सिंह पंवार और तख्त सिंह शक्तावत भी अपनी-अपनी लॉबिंग कर रहे हैं। पंवार की बेटी ममता कुंवर पहले जिला प्रमुख रह चुकी हैं तो शक्तावत भी गिर्वा प्रधान रह चुके हैं। चौहान के पास सीधे तौर पर पंचायतीराज का कोई अनुभव नहीं है। बोर्ड बनने की स्थिति में में लड़ रहे चुनाव युवा नेताओं में बीजेपी के मयूरध्वज सिंह चौहान और ललित सिंह सिसोदिया भी चुनाव लड़ सकते हैं। ये सभी नेता बोर्ड बनने की स्थिति में जिला प्रमुख बनने की उम्मीद में चुनाव लड़ रहे हैं। हालांकि दोनों नए चेहरे है। मयूरध्वज पहले सुखाडिया यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ अध्यक्ष रह चुके हैं। हालांकि उनके पक्ष में बडे़ नेता पैरवी नहीं कर रहे हैं। वे लंबे समय से संगठन की मुख्य धारा में आने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ललित सिंह लॉ कॉलेज के बाद पार्षद का चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि वे दोनों चुनाव हारे हैं। अभी वे बीजेपी देहात में जिला महामंत्री हैं। झाला भी बरसो बाद मिल सकता है मौका वहीं कांग्रेस में बरसों से देहात की राजनीति कर रहे पूर्व देहात जिलाध्यक्ष लालसिंह झाला को लंबे समय बाद चुनाव लड़ने का मौका मिल रहा है। बोर्ड बनने की स्थिति में झाला जिला प्रमुख के सबसे बड़ा नाम हो सकते हैं। हालांकि छात्रसंघ अध्यक्ष रहे राजसिंह झाला भी इस बार पूरी ताकत लगा रहे हैं। राजसिंह का अनुभव और सर्वसहमति लालसिंह झाला के मुकाबले काफी है। राजसिंह पिछले 3 चुनावों में वल्लभनगर विधानसभा से विधायक के लिए कांग्रेस से दावेदारी करते रहे हैं। CSS के प्रमुख नेता रहे अशोक शर्मा और चदाणा में रेस जिले की हॉट पंचायत समिति भींडर, बड़गांव और मावली में भी इस बार कई बड़े नेता रेस में हैं। बड़गांव में अनारक्षित ओपन सीट होने से अशोक शर्मा और नारायण सिंह चदाणा प्रधान बनने की उम्मीद में पूरी तैयारी में लगे हैं। अशोक शर्मा सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में कभी छात्र संघर्ष समिति नामक जैसे तीसरे छात्र संगठन के प्रमुख नेता रहे हैं। लंबे समय तक सीएसएस (छात्र संघर्ष समिति) एबीवीपी को हराने में कामयाब रही है। भींडर में प्रधान की सीट अनारक्षित महिला होने से प्रधान पद की उम्मीद में कांग्रेस नेता कुबेर सिंह चावड़ा अपनी पत्नी यशोदरा कुंवर को मैदान में उतार सकते हैं। हालांकि, भींडर में और भी कई चेहरे रेस में हैं। यशोदरा पहले भी प्रधान रह चुकी हैं। हालांकि इस बार उन्हें कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक प्रीति शक्तावत का समर्थन मिलना बेहद मुश्किल हैं। मावली में भी प्रधान की सीट अनारक्षित महिला होने से भाजपा नेता कृष्णगोपाल पालीवाल, रोशन सुथार और नरेन्द्र सिंह आसेलिया अपने-अपने परिवार की महिला सदस्यों को चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रहे हैं। जिला परिषद् से खुद के जिला प्रमुख पद के समीकरण नहीं बनने की स्थिति में कृष्णगोपाल पालीवाल मावली प्रधान के लिए पत्नी या परिवार की अन्य महिला को चुनाव लड़वा सकते हैं।