सिरोही की पिंडवाड़ा तहसील के वाटेरा गांव में प्रस्तावित खनन परियोजना के विरोध में ग्रामीणों ने पंचायती राज चुनावों के बहिष्कार का ऐलान किया है। ग्रामीणों ने शुक्रवार को बैठक कर सर्वसम्मति से फैसला लिया कि मैसर्स कमलेश मेटाकास्ट की खनन परियोजना निरस्त होने तक वे पंचायत समिति, जिला परिषद, सरपंच और पंच के चुनावों में मतदान नहीं करेंगे। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि उनके लिए जल, जमीन और जंगल की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और परियोजना किसी भी हाल में मंजूर नहीं होने दी जाएगी। चार ग्राम पंचायत क्षेत्रों में प्रस्तावित है परियोजना ग्रामीणों के अनुसार, प्रस्तावित खनन परियोजना करीब 800 हेक्टेयर जमीन पर वाटेरा, भीमाना, भारजा और रोहिड़ा ग्राम पंचायत क्षेत्रों में फैली हुई है। ग्रामीणों को आशंका है कि खनन गतिविधियों से क्षेत्र के जलस्रोतों, जमीन, जंगल और पर्यावरण पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। इसी आशंका के चलते वे परियोजना का विरोध कर रहे हैं। करीब एक साल से जारी है आंदोलन ग्रामीण पिछले करीब एक साल से प्रस्तावित खनन परियोजना के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा। चुनाव बहिष्कार के फैसले के जरिए ग्रामीणों ने सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने का प्रयास किया है। उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक परियोजना निरस्त नहीं होती, तब तक वे चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेंगे। अब सरकार और प्रशासन के फैसले पर निगाहें चुनाव बहिष्कार के ऐलान के बाद अब ग्रामीणों की मांग और प्रस्तावित खनन परियोजना को लेकर सरकार व प्रशासन के अगले कदम पर निगाहें टिकी हैं। ग्रामीणों ने दोहराया कि जल, जमीन और जंगल की रक्षा के लिए उनका आंदोलन जारी रहेगा। अब देखना होगा कि उनकी मांग पर सरकार क्या निर्णय लेती है और परियोजना को लेकर आगे क्या कार्रवाई होती है।