डीडवाना नगर परिषद चुनाव के बहुप्रतीक्षित परिणाम सामने आ चुके हैं, जिन्होंने स्थानीय राजनीति के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। इस बार के नतीजों में जनता का बड़ा मिजाज बदलाव की ओर देखने को मिला है। 2019 की तरह इस बार भी कुल 40 वार्डों के लिए चुनाव संपन्न हुए, लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि 40 में से 36 वार्डों (90 प्रतिशत) में पुराने पार्षद रिपीट नहीं हो सके। चुनाव में जहां कई पुराने पार्षदों ने मैदान ही छोड़ दिया, वहीं चुनाव लड़ने वाले दो से पांच दिग्गजों को हार का सामना करना पड़ा। इस पूरी लहर के बीच महज 4 ऐसे पार्षद रहे जो अपनी रणनीति और जनाधार के दम पर सत्ता में दोबारा वापसी करने में कामयाब रहे। दो प्रमुख चेहरों ने अपनी सीट सुरक्षित रखने के लिए परिवार के सदस्यों को चुनावी मैदान में उतारा। गुलशेर खान: पिछली बार वार्ड नं. 2 से पार्षद चुने गए गुलशेर खान ने इस बार खुद चुनाव न लड़कर अपनी माता को वार्ड नंबर 1 से प्रत्याशी बनाया और जीत दर्ज कराई। कैलाश कटारिया: वार्ड नंबर 31 से पिछली बार चुनाव जीतने वाले कैलाश कटारिया ने इस बार अपनी पत्नी को मैदान में उतारा और जीत हासिल की।