अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (विद्यालय शिक्षा) जिला बारां का दो दिवसीय जिला स्तरीय शैक्षिक सम्मेलन शुक्रवार को निजी मैरिज गार्डन तेल फैक्ट्री पर हुआ। जिला मंत्री कृष्णकांत चौरसिया ने बताया कि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रांतीय संस्कृत प्रमुख एवं धर्म जागरण समन्वयक रामदास महाराज, मुख्य वक्ता चित्तौड़ प्रांत के सह प्रांत कार्यवाह नरेंद्र कंसुरिया और प्रदेश पर्यवेक्षक एवं संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष पूरणमल नागर रहे। कार्यक्रम में जिला शिक्षा अधिकारी सीताराम गोयल, जिला अध्यक्ष माणक मारन, कार्यक्रम संयोजक नरेंद्र मालव एवं जिला मंत्री कृष्णकांत चौरसिया मंचासीन रहे। अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के पूजन एवं दीप प्रज्वलन के साथ सम्मेलन का शुभारंभ किया। अतिथियों का स्वागत-सत्कार किया। संगठन के लिए लंबे समय से समर्पित वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का दुपट्टा पहनाकर सम्मान किया। जिला मंत्री कृष्णकांत चौरसिया ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए वर्षभर संगठन द्वारा किए गए विभिन्न कार्यों एवं गतिविधियों का ब्यौरा प्रस्तुत किया। जिला अध्यक्ष माणक मारन ने स्वागत भाषण दिया। मुख्य अतिथि रामदास महाराज ने सनातन संस्कृति की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अनेक आक्रमणों एवं विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भारतीय संस्कृति चिरकाल से अपनी विशिष्ट पहचान के साथ खड़ी रही है। भारत ने संस्कृति, धर्म एवं संस्कारों से कभी समझौता नहीं किया। उन्होंने कहा कि हमें अपनी संस्कृति, समाज और राष्ट्र के प्रति गौरव का भाव रखते हुए राष्ट्रहित में कार्य करना चाहिए। इतिहास से सीख लेकर नई पीढ़ी में राष्ट्र बोध एवं राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित करना आज की आवश्यकता है। उन्होंने बच्चों में संस्कार एवं राष्ट्रवाद की भावना विकसित करने का आह्वान किया। डीईओ सीताराम गोयल ने संगठन द्वारा संचालित मेरा विद्यालय–मेरा तीर्थ अभियान की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक शिक्षक को अपने विद्यालय को तीर्थ मानकर उसकी स्वच्छता, सुंदरता एवं व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए। विद्यार्थियों को पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध करवाने पर भी उन्होंने जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में आवश्यक मूलभूत सुविधाओं के विकास तथा शौचालय निर्माण की दिशा में भी शीघ्र कार्य किया जाएगा। शिक्षक का आचरण ही विद्यार्थियों के लिए सबसे बड़ा संदेश मुख्य वक्ता सह प्रांत कार्यवाह नरेंद्र कंसुरिया ने कहा कि शिक्षक वह है जो अपने ज्ञान, संस्कार और आचरण से समाज एवं राष्ट्र का निर्माण करता है। संगठन का कार्यकर्ता केवल दिखाई देने वाला कार्यकर्ता नहीं, बल्कि अपने विद्यालय और समाज के प्रति दायित्व निभाने वाला कर्मठ कार्यकर्ता होना चाहिए। उन्होंने नई शिक्षा नीति-2020 को प्रभावी रूप से लागू करने और उसके उद्देश्यों को सफल बनाने के लिए शिक्षकों की सक्रिय भूमिका पर बल दिया। संत शिरोमणि रविदास महाराज के जीवन एवं विचारों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संत रविदास महाराज ने समाज में व्याप्त कुरीतियों एवं भेदभाव को दूर करने का संदेश दिया। प्रदेश पर्यवेक्षक एवं संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष पूरणमल नागर ने संगठन के स्वरूप, उद्देश्यों एवं संगठनात्मक गतिविधियों की जानकारी दी। सम्मेलन के दौरान बालिकाओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। अंत में सम्मेलन संयोजक नरेंद्र मालव ने आभार व्यक्त किया। सह संयोजक गौरीशंकर शर्मा एवं नंदलाल केसरी ने धन्यवाद दिया। मंच संचालन ललित नागर ने किया।