जिसकी सरकार हो, उसी राजनीतिक दल को निकाय और पंचायत चुनाव का फायदा मिलता है। लेकिन पिछले चार चुनाव का ट्रेंड देखें तो पंचायत चुनावों में सरकार के होने या नहीं होने का ज्यादा असर नहीं देखा गया है। वर्ष 2020-21 में जब कांग्रेस की सरकार थी, तब जिला प्रमुख की लड़ाई में भाजपा कांग्रेस से आगे निकल गई थी। पिछले 4 चुनावों का आकलन करें तो प्रदेश की 33 जिला परिषदों में वर्ष 2005 में भाजपा सरकार के समय कांग्रेस के जिला प्रमुखों की संख्या ज्यादा थी। 2010 में कांग्रेस की सरकार के समय भी कांग्रेस आगे निकल गई थी। वर्ष 2015 में भाजपा की सरकार में भाजपा और 2020-21 में कांग्रेस की सरकार में भी भाजपा ही आगे रही। प्रधान के पिछले चुनाव में सरकार होना पॉजिटिव कांग्रेस सरकार में मुकाबला बराबरी का था, कांग्रेस ने 180 प्रधान बनाए पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव को देखें तो सरकार के होने का फायदा मिलता दिखता है। वर्ष 2021 में हुए पंचायत समिति चुनाव में कांग्रेस का पलड़ा भारी रहा था। कुल 6995 सदस्यों में भाजपा कांग्रेस से 141 सदस्यों से पिछड़ गई थी। भाजपा के कुल 2864 सदस्य जीते थे, कांग्रेस के 3005 सदस्य। निर्दलीय व अन्य के कुल 1125 सदस्य निर्वाचित हुए थे। बराबरी के मुकाबले के बावजूद कांग्रेस सरकार के समय तब पार्टी 180 प्रधान बनवाने में सफल हो गई थी। भाजपा के सिर्फ 140 प्रधान ही बन पाए थे। निर्दलीयों को 32 पंचायत समितियों की प्रधानी मिली थी। इस बार होने वाले चुनाव में 457 प्रधानों के लिए मुकाबला होना है। पिछले प्रधानी के चुनाव यानी 2020 से 21 के बीच में चार बार में हुए थे। चारों बार में आरएलपी के 101 सदस्य व दो प्रधान बने थे।