रिपोर्टर ने 5 ​दिन में सड़कों की धूल से खोज निकाला सच राजधानी के नए मेयर सुनील कोठारी ने पद संभालते ही दावा किया कि सफाई मेरी पहली प्राथमिकता है। भास्कर रिपोर्टर ने 5 दिन मैकेनाइज्ड सफाई का ऑडिट किया तो पता चला कि शहर की सड़कों को मशीनों से साफ रखने के लिए निगम ने 5 जोनों में 5 कंपनियों को सफाई का ठेका दे रखा है। सड़क से धूल उठाने के लिए 17 मशीनें दौड़ रही हैं। इसके लिए हर माह 50 लाख रुपए तक भुगतान किया जा रहा है। लेकिन टोंक रोड, जगतपुरा, महल रोड, गोनेर रोड, हल्दी घाटी मार्ग, मानसरोवर, बजाज नगर, भारत माता रोड पर कर्मचारी ट्रैफिक के बीच झाड़ू लगाकर धूल-मिट्टी उठाते नजर आए। यानी भुगतान मशीनों का, सफाई हाथ से। ऐसा लगा जैसे धूल उठाने से ज्यादा आंखों में धूल झोंकी जा रही है। जिम्मेदारों के रटे-रटाए जवाब क्यों... सब मिले हुए हैं क्या? धूल से सनी कचरा व्यवस्था पर जब भास्कर ने नगर निगम के एक्सईएन गैराज गोपाल मूंढ से सवाल किया तो उन्होंने कहा- अलग-अलग जोन में 5 कंपनियां हैं। निगम के पास भी ट्रक माउंटेन हैं। कंपनियों को निगम की मशीनरी देने और ज्यादा भुगतान के सवाल पर बोले- सभी के टेंडर अलग-अलग हैं। रटा-रटाया जवाब- धूल नहीं उठ रही है तो जांच कराएंगे। सवाल यह उठता है कि टेंडर हुए हैं, कंपनियां काम कर रही हैं, लेकिन मॉनिटरिंग का जिम्मा तो निगम का ही है। जिम्मेदारों के ऐसे रटे-रटाए जवाब जनता को स्वीकार्य नहीं है। सफाई के बजट पर ‘झाड़ू’; मशीनरी सरकारी, पैसा जनता का, फोकट में कंपनियों को बंट रहा जगतपुरा ओवरब्रिज इस रोड की सफाई का काम ट्रक माउंटेन से होना तय है। लेकिन, ओवरब्रिज के फुटपाथ पर जमी धूल कर्मचारी झाड़ू से इकट्ठा कर उठाते हैं। टोंक रोड; मशीन, ब्रश, डीजल और कर्मचारी सब निगम के, हर माह 15.17 लाख भुगतान, मौके पर धूल के ढेर, हाथ से सफाई नगर निगम तीन कंपनियों को ही धूल उठाने के लिए हर माह 28.71 लाख रुपए का भुगतान कर रहा है। सबसे ज्यादा टोंक रोड पर 15.17 लाख दे रहा। यहां का ठेका मैकेनाइज्ड सफाई विवेक एंटरप्राइजेज के पास है। निगम ने दो ट्रक माउंटेन मशीनें RJ47-EA-0435 और RJ47-EA-0436 दे रखी हैं। इसमें लगने वाला डीजल, झाड़ू, कर्मचारी सब निगम दे रहा है। कंपनी को सिर्फ संचालन करना है। भुगतान पारी के हिसाब से अगस्त में ₹15,17,481 किया गया। इसके बावजूद कर्मचारी हाथ से सफाई करते मिले। 200 फीट बाईपास यहां डिवाइडर के दोनों ओर आधा फीट तक मिट्टी की लेयर है। ऐसा, लगा जैसे मशीन कभी चली ही नहीं। जरा-सी तेज हवा में धूल का गुबार उड़ने लगता है।