बाड़मेर के एक युवा उद्यमी ने समाज सेवा और बालिका शिक्षा के क्षेत्र में अनुकरणीय मिसाल पेश की है। युवा उद्यमी ने करीब एक करोड़ की लागत से बालिकाओं के लिए सर्वसुविधायुक्त हॉस्टल का निर्माण करवाया है ताकि उसमें रह कर जरूरतमंद बालिकाएं अपनी शिक्षा पूरी कर सकें और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकें। वर्तमान में यहां 30 बेटियां परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं। ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर अपनी मेहनत के बल पर सफल उद्यमी बनने वाले जोगेंद्र गौड़ की यह पहल समाज की बेटियों के उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर रही है। जानकारी के अनुसार गांव में एक मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का भव्य आयोजन चल रहा था। इस दौरान शिखर कलश स्थापना के लिए जब बोली लगाई जा रही थी, तो युवा उद्यमी जोगेंद्र गौड़ ने बढ़-चढ़कर इसमें हिस्सा लिया। उन्होंने इस प्रतिष्ठित बोली में सबसे आगे रहते हुए 40 लाख रुपये की सबसे बड़ी बोली लगाई। लेकिन जब गांव के लोगों और शुभचिंतकों ने उन्हें क्षेत्र की बालिकाओं को शिक्षा में हो रही परेशानी की जानकारी दी तो उन्होंने अपनी यह बोली छोड़ दी। उन्होंने समाज और गांव के हित को सर्वोपरि रखते हुए इस राशि को समाज की बेटियों के भविष्य को संवारने में लगाने का निर्णय लिया। इस निर्णय के बाद गौड़ ने अपने मित्रों और समाज के वरिष्ठ शिक्षाविदों से गहन विचार-विमर्श किया। सभी की सलाह पर यह निष्कर्ष निकला कि आज के समय में समाज की बालिकाओं की उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए एक सुरक्षित व सर्वसुविधायुक्त आवासीय परिसर की सख्त जरूरत है। इस पर बिना किसी संकोच के जोगेंद्र गौड़ ने सुमेर गोशाला के पास स्थित अपनी खुद की 10 हजार वर्ग फीट की कीमती जमीन बालिका शिक्षा के नाम समर्पित कर दी। आज इसी जमीन पर लगभग एक करोड़ रुपए की लागत से एक शानदार और सर्वसुविधायुक्त भवन खड़ा है। आधुनिक सुविधाओं से लैस है हॉस्टल, 30 बेटियां पढ़ रही:जोगेंद्र गौड़ द्वारा बनवाए गए इस आधुनिक भवन में बालिकाओं की सुविधा का पूरा ध्यान रखा गया है। इस सर्वसुविधायुक्त हॉस्टल में कुल 15 कमरे, एक विशाल डाइनिंग हॉल और पढ़ाई के लिए एक सर्वसुविधायुक्त लाइब्रेरी का निर्माण करवाया गया है। वर्तमान शैक्षणिक सत्र में ब्राह्मण समाज की 30 मेधावी बेटियां इस हॉस्टल में रहकर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की कड़ी तैयारी कर रही हैं। बेटियों को पढ़ाई के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए हॉस्टल में विशेष प्रबंध किए गए हैं। बालिकाओं के लिए पौष्टिक भोजन और नाश्ते की व्यवस्था के लिए रसोइया नियुक्त किया गया है, वहीं हॉस्टल की पूरी सुरक्षा और जिम्मेदारी संभालने के लिए एक समर्पित महिला वार्डन भी मौजूद हैं। विशेषज्ञ दे रहे हैं निशुल्क सेवाएं, भामाशाहों का सहयोग: इस पहल का सबसे खूबसूरत पहलू यह है कि समाज की इन बेटियों को मुकाम तक पहुंचाने के लिए कई विद्वान आगे आए हैं। असिस्टेंट प्रोफेसर प्रकाश गौड़, देवराज गौड़, व्याख्याता पुखराज गौड़, भगवान सहाय शर्मा, वरिष्ठ अध्यापक सरिता और सांख्यिकी अधिकारी अशोक बबेरवाल अपना बहुमूल्य समय निकालकर इन बालिकाओं को पूरी तरह निशुल्क शिक्षा व मार्गदर्शन दे रहे हैं। इस भवन को पूरी तरह सर्वसुविधायुक्त बनाने के लिए ओमप्रकाश शर्मा के प्रयासों से फंड एकत्रित किया गया।