नगर निगम के 272 प्लॉट घोटाले में आरोपी को राहत दिलाने और 2 किलो सोने के जेवर छोड़ने के बदले 2 करोड़ रुपए की घूस लेने के मामले में नया मोड़ आया है। एसीबी इंटेलिजेंस यूनिट की जांच में दलाल सज्जन सिंह जैन उर्फ टाटला के साथ एसओजी एएसपी मुकेश सोनी की भी घूसकांड में संलिप्तता और साजिश सामने आई है। इसके बाद एसीबी ने रविवार को एसओजी एएसपी मुकेश सोनी को भी गिरफ्तार कर लिया। शाम को दोनों आरोपियों को एसीबी कोर्ट के जज के निवास पर पेश किया गया, जहां से दोनों को तीन दिन के रिमांड पर लिया गया। अब एसीबी दोनों से पूछताछ करेगी। एसीबी टीम ने रविवार शाम गोवर्धन विलास स्थित एसओजी ऑफिस में सर्च ऑपरेशन चलाया। एएसपी गोपाल स्वरूप मेवाड़ा, डीएसपी सोनू शेखावत मय टीम शाम 7 बजे एसओजी ऑफिस पहुंचे। इसके बाद एक-एक दस्तावेज खंगाले गए। कार्रवाई देर रात तक चली। इस दौरान आरोपी मुकेश सोनी भी टीम के साथ मौजूद रहा। परिवादी निरंजन मोगरा से जब्त किए गए जेवर और दस्तावेजों के बारे में भी पूछताछ की गई। खास तौर पर यह देखा गया कि परिवादी के घर से कार्रवाई के दौरान कौन-कौन सा सामान लिया गया था और उसमें से कितना सामान जब्ती की फर्द में दर्ज किया गया। सर्च में मिले दस्तावेज, केस डायरी, जब्ती रिकॉर्ड और अन्य रिकॉर्ड का परिवादी के आरोपों से मिलान किया जाएगा। पुराने दोस्त थे सज्जन व परिवादी, अफसरों से पहचान भुनाकर खेल जांच में यह भी सामने आया कि सज्जन जैन और परिवादी निरंजन मोगरा पुराने दोस्त हैं। सज्जन की कई अधिकारियों से अच्छी पहचान है। इनमें एएसपी मुकेश सोनी भी शामिल थे। जमानत पर छूटने के बाद परिवादी को पता चला कि उसके घर से ले जाए गए जेवर और अन्य सामान जब्ती की फर्द में दर्ज नहीं किए गए। उसने 2 किलो जेवर वापस मांगे। आरोप है कि इसके लिए उसे बार-बार गिरफ्तार करने की धमकी दी गई। इसके बाद परिवादी ने सज्जन से 2 किलो जेवर छुड़वाने और केस में राहत दिलाने के लिए मदद मांगी। सज्जन ने इसके बदले एएसपी के नाम पर 1 करोड़ रुपए की घूस मांगी। बाद में एएसपी से घूस की रकम बढ़ाकर 2 करोड़ रुपए कर दी गई।