केंद्र सरकार ने शहर की हर संपत्ति को यूनिक डिजिटल आईडी देने और संपत्ति का रिकॉर्ड डिजिटल बनाने के उद्देश्य से नक्शा पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया। ब्यावर सहित राजस्थान के 10 शहरों में इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चलाया गया, लेकिन ब्यावर में इसकी धीमी रफ्तार रही। 21 हजार से अधिक संपत्तियों का सर्वे अटकने और टेंडर अवधि बढ़ाए जाने के बावजूद संतोषजनक काम नहीं होने पर नगर परिषद आयुक्त कीर्ति कुमावत को नक्शा प्रोजेक्ट की पूरी सर्वे टीम के साथ गुरुवार को निदेशालय में तलब किया गया। प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश के बगरू, बहरोड़, नाथद्वारा, नवलगढ़ और पुष्कर जैसे शहरों में भौतिक सत्यापन का काम 100% पूरा हो चुका है, वहीं ब्यावर 71% पर ही अटका हुआ है। ब्यावर में कुल 73,896 संपत्तियों के भौतिक सत्यापन का लक्ष्य था, जिसमें से 21 हजार से अधिक संपत्तियां अब भी डिजिटल मैपिंग से बाहर हैं। प्रोजेक्ट के लिए ब्यावर में 25 टीमें लगाई हैं। हर टीम को रोजाना कम से कम 30 संपत्तियों के सर्वे का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन धरातल पर औसतन केवल 13 संपत्तियों का ही सर्वे हो पा रहा है। टेंडर को 4 माह तक बढ़ाकर 19 नवंबर तक समय लिया गया है। अफसरों की लापरवाही के कारण प्रोजेक्ट बजट अब 70 लाख से बढ़कर 1.06 करोड़ रुपए पहुंच गया है।
फील्ड में सर्वे करने पहुंच रही टीमें लोगों से मौके पर ही मकान-दुकान की मूल रजिस्ट्री और अन्य दस्तावेज मांग रही हैं। साइबर ठगी और ऑनलाइन फ्रॉड के बढ़ते मामलों से मूल दस्तावेज मांगे जाने से आमजन में डर है। लोगों का कहना है कि साइबर ठगी के दौर में बिना आधिकारिक पहचान और स्पष्ट सूचना के मूल दस्तावेज किसे और क्यों दें? एईएन नेतराम बैरवा ने स्पष्ट किया कि किसी अधिकारी ने मौके पर मूल दस्तावेज मांगने का लिखित आदेश नहीं दिया। 30 सितंबर को शासन सचिव, स्वायत्त शासन विभाग की अध्यक्षता में वीसी से नक्शा पायलट प्रोजेक्ट की प्रगति समीक्षा बैठक हुई थी। ब्यावर की लचर परफॉर्मेंस पर अधिकारी ने नाराजगी जताई। बताते हैं कि जिस बैठक में खुद आयुक्त को मौजूद होना था, उनकी जगह हाल ही परिषद के एईएन को भेज दिया। जब एईएन से इस संबंध में सवाल किया तो जवाब मिला कि आयुक्त डीएम की मीटिंग में व्यस्त है। इस पर भी अधिकारी ने नाराजगी जताई। समीक्षा बैठक के तुरंत बाद अतिरिक्त निदेशक एवं नक्शा नोडल अधिकारी डॉ. अशोक कुमार ने आयुक्त को आदेश जारी कर नक्शा टीम के साथ व्यक्तिगत रूप से निदेशालय में तलब कर लिया। 1. ग्राउंड ट्रूथिंग: ड्रोन या एरियल फोटोग्राफी और मैपिंग के बाद फील्ड टीमें मौके पर जाकर संपत्ति की वास्तविक स्थिति, सीमाओं और माप का सत्यापन करती हैं। इस चरण में प्रॉपर्टी मालिक के विवरण का मिलान किया जाता है। 2. प्लॉट करेक्शन और वेरिफिकेशन: ग्राउंड ट्रूथिंग से मिले डेटा और नक्शे में यदि कोई विसंगति, अतिक्रमण या त्रुटि पाई जाती है, तो उसे सुधारा जाता है। इसके बाद संशोधित नक्शे का अंतिम सत्यापन किया जाता है। 3. आरओआर: यह संपत्ति के कानूनी अधिकारों का आधिकारिक रिकॉर्ड होता है। जमीन/मकान का मालिक कौन है, क्षेत्रफल कितना है और संपत्ति का प्रकार क्या है, पूरा कानूनी विवरण दर्ज होता है। 4. प्रॉपर्टी कार्ड: प्रक्रिया के अंतिम चरण में संपत्ति मालिक को एक आधिकारिक डिजिटल "प्रॉपर्टी कार्ड' जारी होगा। इसमें संपत्ति की यूनिक डिजिटल आईडी दर्ज होगी, जो भविष्य में संपत्ति की खरीद-बिक्री, लोन और विवादों के निपटारे में एक प्रामाणिक दस्तावेज का काम करेगी।