कांग्रेस में क्रास वोटिंग के लिए 346 पार्षदों के अलावा 32 विधायक, पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री भी जांच के दायरे में हैं। ये विधायक, पूर्व मंत्री पाली, जालौर, सिरोही, अजमेर, जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, चित्तौड़गढ़, अलवर, भरतपुर, कोटा, नागौर, गंगानगर, भीलवाड़ा के हैं। अजमेर, पाली, भीलवाड़ा नगर निगम में कांग्रेस पार्टी की बुरी हार और 113 निकायों में भारी संख्या में बगावत व क्रास वोटिंग की जांच के लिए बनाई डॉ. सीपी जोशी कमेटी ने शनिवार को जांच शुरू कर दी है। कमेटी का पहला फोकस पाली, अजमेर, भीलवाड़ा, कोटा में मेयर चुनाव, बीकानेर में उपमहापौर चुनाव, जोधपुर में महापौर चुनाव की जांच पर है। इन स्थानों पर पार्टी का निकाय चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद हार से दिल्ली आलाकमान खासा नाराज है। राष्ट्रीय महासचिव के सी वेणुगोपाल ने 21 सितंबर को सभी विधायक, सांसद व पीसीसी अधिकारियों को जांच के बाद कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। उसकी पालना में क्रास वोटिंग जांच कमेटी बनाई गई। जिला अध्यक्ष, प्रभारी के साथ प्रत्याशी से होगी पूछताछ यह कमेटी पीसीसी की तरफ से दी गई रिपोर्ट के आधार पर बगावत वाले निकायों के प्रभारी, जिला अध्यक्ष, 2 विधायकों को बुलाकर पूछताछ करेगी। आवश्यक होने पर बगावत करने वाले पार्षद को भी बुलाया जा सकता है। इसके अलावा बगावत में किन किन नेताओं या अन्य व्यक्तियों ने भूमिका निभाई, इसकी भी जांच होगी। बताया जा रहा है कि कई बड़े नेता भी पार्टी विरोधी कार्यों में लिप्त पाए गए। सह भी जांच: कुछ विधायक राडार पर, पार्टी को हराने के आरोप कमेटी यह भी जांच करेगी कि पाली में सारे पार्षद विधायक के पास थे। ऐसे में दूसरा खेमा विधायक के पास से बस भरकर 28 विधायक उठा कर कैसे ले गया। विधायक को भाई को सरेराह पीटा गया, उसी गुट ने विधायक के पास रखे गए पार्षद कैसे निकाल कर अपने बाड़े में बंद कर दिए? इसी तरह उदयपुर, कोटा, अजमेर, बीकानेर में क्रास वोटिंग में किन किन विधायकों की भूमिका संदिग्ध है। इसकी जांच कर कार्रवाई होगी।