शहर के जवाहर नगर सेक्टर-2 में 50 साल पहले बसाया गया आधुनिक मॉडल बाजार ‘गोल मार्केट’ बदहाल है। बड़ी चौपड़ और दिल्ली के गोल मार्केट के आधार पर बसा मार्केट 5 दशक में ही जर्जर हो गया। कई जगह अतिक्रमण हो गया तो कई जगह अवैध गोदाम बन गए। पांच दशक बाद यह पहचान लगभग खत्म हो चुकी है। बीच का खुला परिसर कार पार्किंग बन गया। चारों ओर कचरे और झाड़ियां हैं। फाउंटेन बंद पड़ा है और कई दुकानें व इमारतें जर्जर हो चुकी हैं। इसको लेकर आवासन मंडल और नगर निगम एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। आवासन मंडल का कहना है कि 1992 के बाद गोल मार्केट निगम को सौंप दिया था। निगम का कहना है कि संपत्ति अब भी आवासन मंडल की है, निगम केवल साफ-सफाई करता है। स्थानीय लोग हाउसिंग बोर्ड और आदर्श नगर जोन कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। मार्केट-फ्लैट सब जर्जर; पहचान खत्म हो रही गोल मार्केट व्यापार मंडल, जवाहर नगर के अध्यक्ष नरेंद्र बैरवाल के अनुसार योजना में परकोटे की तर्ज पर नीचे दुकान और ऊपर मकान की व्यवस्था की गई थी। ताकि आवासीय कॉलोनी में लोगों को घर के पास ही व्यावसायिक जगह मिले और बाजार दिनभर सक्रिय रहे। इसे मिश्रित भू-उपयोग या ‘वर्क-लिव’ कॉन्सेप्ट कहा जाता है। ध्यान नहीं दिया तो 5 दशक पुरानी सोच खत्म हो जाएगी। 8 साल पहले बोर्ड ऑफिस हटते ही बढ़े अतिक्रमण राजस्थान आवासन मंडल के रिकॉर्ड में गोल मार्केट का उल्लेख आज भी मिलता है। मंडल की 2019-20 की संपत्ति सूची में भी यह दर्ज था। 2024 के हाईकोर्ट के एक आदेश में मंडल के हाउसिंग इंजीनियर, डिवीजन-1 का पता भी गोल मार्केट, जवाहर नगर दर्ज है। हाउसिंग बोर्ड प्रोजेक्ट लीज के आधार पर सौंपता है। प्रॉपर्टी अब भी बोर्ड की है। निगम का काम साफ-सफाई है, जो करवा रहे हैं। गोल मार्केट पुराना है, इसलिए जर्जर हो चुका है। -बिजेंद्र सिंह, उपायुक्त, आदर्श नगर जोन, नगर निगम 1992 के बाद गोल मार्केट निगम को सौंप दिया था। सफाई-अतिक्रमण हटाने का काम निगम का है। 30 साल पुरानी संपत्ति को रखरखाव की जरूरत। उपयोग करने वालों को मेंटेनेंस कराना चाहिए। -राजेश व्यास, उप आवासन आयुक्त, वृत्त-3