जैन धर्मावलंबियों का प्रमुख आध्यात्मिक महापर्व पर्युषण मंगलवार से श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ शुरू होगा। आठ दिनों तक चलने वाले इस महापर्व के दौरान श्वेतांबर समुदाय के श्रद्धालु तप, जप, स्वाध्याय, प्रतिक्रमण, ध्यान और साधना के जरिए आत्मशुद्धि का संकल्प लेंगे। पर्व का समापन 15 सितंबर को संवत्सरी के दिन परस्पर क्षमायाचना और मिच्छामि दुक्कड़म् के भाव के साथ होगा। जैन धर्म में पर्युषण पर्व को पर्वधिराज यानी सभी पर्वों का राजा माना गया है। साध्वी हिरण्यागुणा के अनुसार पर्युषण केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आत्मनिरीक्षण का अनुपम अवसर है। इस दौरान व्यक्ति अपनी भौतिक और सांसारिक व्यस्तताओं से थोड़ा अलग होकर अपने विचारों, व्यवहार और कर्मों की गंभीर समीक्षा करता है। भगवान महावीर स्वामी के बताए मार्ग पर चलते हुए श्रद्धालु अहिंसा, संयम, तपस्या और दान के माध्यम से आत्मा पर लगे कर्म रूपी मैल को धोते हैं। चातुर्मास के 49वें या 50वें दिन आने वाला यह पर्व आत्मा को परमात्मा की ओर ले जाने वाला माध्यम है। 15 को संवत्सरी पर करेंगे मिच्छामि दुक्कड़म्, चातुर्मासिक प्रवचन माला का होगा आयोजन पर्व के दौरान सभी जैन मंदिरों व उपाश्रयों में प्रतिदिन प्रात: धार्मिक प्रवचन व स्वाध्याय के कार्यक्रम होंगे। प्रात: एवं दोपहर का सत्र: सुबह जैन आगम सूत्र अंतकृत दशांग सूत्र का मूल एवं भावार्थ सहित वाचन होगा, वहीं दोपहर के समय कल्पसूत्र का पाठ किया जाएगा। शाम का सत्र: प्रात: और सायंकाल प्रतिक्रमण के माध्यम से श्रद्धालु अपने जाने-अनजाने किए गए पापों का पश्चाताप करेंगे। बाड़मेर. पर्युषण महापर्व का प्रतीकात्मक फोटो। शहर के प्रमुख नाहटा ग्राउंड में पर्युषण पर्व के उपलक्ष्य में धार्मिक सभाओं व सामूहिक आराधना के विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकजुट होकर सामूहिक जप, तप और साधु-साध्वियों के सान्निध्य में विशेष धर्म आराधना करेंगे। वहीं साधना भवन में साधु-साध्वी वृंद की निश्रा में प्रतिदिन चातुर्मासिक प्रवचन माला का आयोजन होगा। सुबह की बेला में आगम वाचन और दोपहर में श्रद्धालुओं की ओर से कल्पसूत्र का पाठ किया जाएगा। महापर्व का समापन 15 सितंबर को संवत्सरी पर्व के रूप में होगा। इस दिन विशेष आत्मालोचना का पाठ किया जाएगा। जैन धर्मावलंबी पुरानी कड़वाहटों और मनमुटाव को भुलाकर ह्रदय से क्षमा मांगेंगे ।