अजमेर के मेयर चुनाव में निर्दलीयों ने पूरा गणित ही पलट दिया। यहां 37 सीटों पर जितने के बाद भी कांग्रेस अपना मेयर नहीं बना सकी। वहीं, 32 सीटों पर जीतने वाली भाजपा का मेयर बना है। भाजपा को 11 निर्दलीयों का साथ मिला। 43 वोटों के साथ मेयर की कुर्सी अपने नाम कर ली। इस नतीजे ने कांग्रेस के खेमे में क्रॉस वोटिंग, अंदरूनी गुटबाजी और रणनीतिक चूक को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस अपने मूल आंकड़े से आगे नहीं बढ़ सकी। वहीं, भाजपा ने 11 वोट जोड़ लिए। कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग किसने की खास बात यह रही कि कांग्रेस 5 निर्दलीयों को अपने साथ होने का दावा कर रही थी, उनमें से 2 मेयर चुनाव के दौरान भाजपा खेमे के साथ नजर आए। 3 कांग्रेस खेमे के साथ दिखे। अगर इस गणित को भी मानें कि 3 निर्दलीय कांग्रेस के साथ थे तो 40 वोट मिलने चाहिए थे। लेकिन मिले 37 वोट। ऐसे में क्रॉस वोटिंग निर्दलीयों ने की या कांग्रेस के पार्षदों ने की। पार्टी के सामने ये बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। 37 से आगे नहीं बढ़ी कांग्रेस, यहीं से क्रॉस वोटिंग की चर्चा मेयर चुनाव का सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल यही है कि कांग्रेस के 37 पार्षदों में से क्या सभी ने पार्टी प्रत्याशी को ही वोट दिया? वोटों के आंकड़े से इतना स्पष्ट है कि कांग्रेस प्रत्याशी को 37 वोट मिले, जो कांग्रेस के कुल पार्षदों की संख्या के बराबर हैं। ऐसे में व्यक्तिगत रूप से किसी पार्षद के क्रॉस वोट करने की पुष्टि केवल मतदान के आंकड़े से नहीं की जा सकती। लेकिन चुनाव से पहले निर्दलीयों को लेकर दोनों दलों के दावों और वोटिंग के बाद सामने आए 43-37 के अंतर ने क्रॉस वोटिंग की चर्चा जरूर तेज कर दी। दोनों पार्टी 11 निर्दलीयों के समर्थ का दावा कर रही थी पार्षद चुनाव के बाद दोनों ही दल 11 निर्दलीयों के समर्थन का दावा कर रहे थे। कांग्रेस की ओर से घनश्याम वर्मा, कैलाश कोमल और विनोद कुमार को अपने साथ बताया गया था। ये तीनों मेयर वोटिंग के दौरान कांग्रेस के साथ दिखाई भी दिए। इसके बावजूद कांग्रेस को 37 ही वोट मिले। दूसरी तरफ भाजपा के 32 पार्षदों के साथ कुल 43 वोट पड़े। यानी भाजपा को 11 अतिरिक्त वोट मिले। यही 11 वोट पूरे मेयर चुनाव का सबसे बड़ा राजनीतिक गणित बन गए। भाजपा का कहना है कि निर्दलीय उसकी विचारधारा के साथ थे, जबकि कांग्रेस ने चुनाव के बाद हॉर्स ट्रेडिंग, धनबल और सत्ता के इस्तेमाल के आरोप लगाए। यानी दोनों दलों की ओर से इन 11 वोटों को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दावे सामने आए। सोफिया-अजहर की तस्वीरों ने बढ़ाया सस्पेंस वार्ड 11 से कांग्रेस से बागी होकर जीतीं सोफिया और वार्ड 14 के अजहर को लेकर भी चुनाव के दौरान तस्वीर बदली हुई नजर आई। कांग्रेस पहले इनके समर्थन का दावा कर रही थी, लेकिन मेयर वोटिंग के दौरान दोनों भाजपा पार्षदों के साथ दिखाई दिए। इन तस्वीरों ने कांग्रेस के दावों और जमीनी समीकरण को लेकर राजनीतिक चर्चा को और तेज किया। हालांकि किस निर्दलीय ने किसे वोट दिया, यह व्यक्तिगत मतदान के आधार पर सार्वजनिक रूप से तय नहीं किया जा सकता। लेकिन वोटिंग के दिन खेमों के साथ दिखाई देने वाले पार्षदों और अंतिम वोट आंकड़ों ने चुनाव के राजनीतिक समीकरण को जरूर चर्चा में ला दिया। भाजपा से बागी हुए निर्दलीय भी भाजपा के साथ दिखें दूसरी तरफ भाजपा से बागी होकर निर्दलीय चुनाव जीते रूबी जैन, सुनील गुर्जर, मदन सिंह, कुंदन वैष्णव, मोनिका सुईवाल और गायत्री सोनी भी मेयर वोटिंग के दौरान भाजपा के साथ नजर आए। यानी भाजपा के 32 पार्षदों के अलावा निर्दलीयों की मौजूदगी ने उसके 43 के आंकड़े को लेकर तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट कर दी। भाजपा अपने मूल आंकड़े से 11 वोट आगे निकल गई और यहीं कांग्रेस के 37 तथा भाजपा के 43 वोटों के बीच 6 वोट का अंतर बन गया। कांग्रेस की गुटबाजी भी बनी चुनावी चर्चा का हिस्सा मेयर चुनाव सिर्फ निर्दलीयों के समर्थन का चुनाव नहीं रहा। कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी भी लगातार चर्चा में रही। पूर्व RTDC अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ और अजमेर शहर के पूर्व जिला अध्यक्ष विजय जैन के गुटों को लेकर खींचतान की चर्चा चुनाव से पहले और चुनाव के दौरान सामने आती रही। बाद में दोनों नेताओं की ओर से एकजुटता का दावा किया गया, लेकिन प्रत्याशी चयन तक मामला प्रदेश स्तर के नेताओं के हस्तक्षेप तक पहुंचा। किरण गढ़वाल के नाम पर सहमति बनने के बाद कांग्रेस ने अपने पार्षदों को एकजुट रखने के लिए बाड़ेबंदी भी की। लेकिन चुनाव परिणाम में पार्टी 37 से आगे नहीं बढ़ सकी। बाड़ेबंदी के बावजूद नहीं बदला कांग्रेस का आंकड़ा कांग्रेस ने अपने पार्षदों की बाड़ेबंदी की। उद्देश्य साफ था मेयर चुनाव तक सभी पार्षदों को एकजुट रखना और प्रत्याशी के पक्ष में मतदान सुनिश्चित करना। लेकिन परिणाम में कांग्रेस के वोट 37 ही रहे। दूसरी तरफ भाजपा ने 32 से शुरुआत कर 43 वोट हासिल किए। यानी भाजपा ने बहुमत के लिए जरूरी 41 के आंकड़े से भी 2 वोट ज्यादा जुटाए। यही वजह है कि चुनाव के बाद कांग्रेस खेमे में क्रॉस वोटिंग, निर्दलीयों के रुख और गुटबाजी तीनों मुद्दे चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। भाजपा ने विचारधारा का समर्थन बताया, कांग्रेस ने लगाए हॉर्स ट्रेडिंग के आरोप भाजपा जिला अध्यक्ष रमेश सोनी ने कहा कि 11 निर्दलीय भाजपा की विचारधारा के साथ थे और सभी ने भाजपा को वोट दिया। उन्होंने कांग्रेस के दावों को खोखला बताते हुए कहा कि पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी का फायदा भाजपा को मिला। वहीं कांग्रेस जिला अध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल ने मेयर चुनाव में हॉर्स ट्रेडिंग, धनबल और सत्ता के इस्तेमाल के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जनता सब जानती है और जल्द इसका जवाब देगी। 36 साल की भाजपा बोर्ड की परंपरा बरकरार, लेकिन इस बार कहानी अलग अजमेर में पिछले 36 साल से भाजपा का बोर्ड रहा है। इस बार पार्षद चुनाव में कांग्रेस 37 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। भाजपा के पास 32 सीटें थीं। इसके बावजूद मेयर चुनाव में भाजपा ने 43 वोट हासिल किए और 8वीं बार भाजपा ने अपना बोर्ड बना लिया। ये भी पढ़ें… अजमेर में 8वीं बार बीजेपी का बोर्ड,अनामिका शर्मा बनीं मेयर:निर्दलीयों से गठजोड़ में भाजपा रही आगे; ससुर ने पार्टी का झंडा लेकर किया डांस अजमेर- पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष की बहू बनी नई मेयर:पुष्कर के गायत्री महायज्ञ में संभाली थी फाइनेंस मैनेजमेंट की जिम्मेदारी, पहली बार लड़ा चुनाव