अजमेर में नाबालिग बच्चियों से जुड़े यौन अपराध के दो अलग-अलग मामलों में शुक्रवार को पोक्सो कोर्ट-1 ने दो आरोपियों को 10-10 साल की जेल की सजा सुनाई है। एक मामले में आरोपी घर से बाहर निकली बच्ची का मुंह दबाकर उसे मकान में ले गया था, फिर रेप किया। वहीं दूसरे मामले में आरोपी ने कुरकुरे का लालच देकर बच्ची के साथ रेप करने की कोशिश की थी। दोनों मामलों में सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपियों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई। विशिष्ट न्यायाधीश हेमंत सिंह ने दोनों मामलों में फैसला सुनाया। अदालत ने दोनों पर कुल 33 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। साथ ही पीड़िताओं को नियमानुसार प्रतिकर(मुआवजा) राशि दिलाने के निर्देश दिए। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मासूम बच्चियों के साथ ऐसे घिनौने अपराध करने वाले आरोपियों के प्रति नरमी बरतना न्यायोचित नहीं है। इससे समाज में असंवेदनशीलता का गलत संदेश जाता है। दोनों मामलों में अभियोजन पक्ष की ओर से विशिष्ट लोक अभियोजक प्रशान्त यादव ने पैरवी की। केस-1 : नाबालिग का मुंह दबाकर मकान में ले जाकर किया रेप जिले के ग्रामीण थाने में 3 दिसंबर 2024 को दर्ज मामले के अनुसार, परिवादी 2 दिसंबर को बैंड बजाने के लिए घर से बाहर गया था। घर पर उसकी बेटी और भतीजी मौजूद थीं। दिन में नाबालिग भतीजी पेशाब करने के लिए घर से बाहर निकली। आरोप है कि इसी दौरान आरोपी ने उसका मुंह दबाया और जबरन अपने मकान में ले गया। वहां उसके साथ दुष्कर्म किया। बच्ची रोते हुए घर पहुंची और परिजनों को घटना की जानकारी दी। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन ने 14 गवाह और 33 दस्तावेज पेश किए। पीड़िता और आरोपी के डीएनए सैंपल की रिपोर्ट भी अदालत में पेश की गई। साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को 10 साल के कठोर कारावास और 10 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई। अदालत ने विधिक सेवा प्राधिकरण को पीड़िता को प्रतिकर राशि दिलाने के निर्देश दिए। केस-2 : कुरकुरे का लालच दिया, खेत में ले जाकर रेप का प्रयास जिले के एक और ग्रामीण क्षेत्र के थाने के इस मामले में 10 दिसंबर 2024 को रिपोर्ट दर्ज हुई थी। पीड़ित के अनुसार, उसकी 8 वर्षीय पोती घर के बाहर खेल रही थी। इसी दौरान बाइक से आए आरोपी ने बच्ची से पेट्रोल पंप का रास्ता पूछा। इसके बाद रास्ता बताने के बदले कुरकुरे दिलाने का लालच देकर उसे अपने साथ ले गया। आरोप है कि आरोपी बच्ची को पेट्रोल पंप ले जाने के बजाय जंगल की तरफ सरसों के खेत में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म का प्रयास किया। इसी दौरान खेत मालिक कुएं के पास लाइट देखने पहुंचा। बच्ची की चीख सुनकर वह मौके पर पहुंचा और आरोपी को पकड़ लिया। सुनवाई के दौरान अभियोजन ने 12 गवाह और 21 दस्तावेज पेश किए। अदालत ने पोक्सो एक्ट की धारा में 10 साल के कठोर कारावास और 23 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। कोर्ट ने कहा- कठोर दंड जरूरी अदालत ने 8 वर्षीय बच्ची से जुड़े मामले में कहा कि अबोध ग्रामीण बालिका की लज्जा भंग कर उसके साथ लैंगिक आशय से छेड़छाड़ की। उस पर बिना प्रवेशन गुरुतर प्रवेशन लैंगिक हमला करने का प्रयास करने और कुरकुरे दिलाने का लालच देकर उसका व्यपहरण करने के अपराध प्रमाणित हुए हैं। ऐसा अपराध करने वाले व्यक्ति के लिए नरमी का रूख अपनाया जाना न्यायोचित नहीं होगा, वरन ऐसा करने से समाज में ऐसे अपरोधों के लिए असंवेदनशीलता का प्रतिकूल संदेश जाएगा। विधायिका द्वारा भी ऐसे अपराधों की प्रकृति और समाज पर इनके प्रभाव को देखते हुए कठोर न्यूनतम दंड का प्रावधान किया गया है। अतः पीड़िता की आयु एवं प्रकरण की समग्र परिस्थितियों को देखते हुए और पोक्सो अधिनियम की मंशा व न्याय के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु आरोपी के विरूद्ध किसी प्रकार की नरमी का रूख नहीं अपना कर उसे समुचित दंड से दंडित किया जाना उचित होगा।