अलवर नगर निगम में मेयर चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी रिंकल गर्ग ने नामांकन वापस ले लिया। संग्राम अब पूरी तरह से बीजेपी और कांग्रेस के बीच हो गया है। अब दो महिला प्रत्याशी मैदान में हैं। बीजेपी की ओर से वार्ड नंबर 7 की पार्षद सुमनलता अग्रवाल और कांग्रेस की ओर से वार्ड नंबर 39 की पार्षद कमलेश शर्मा हैं। नामांकन वास लेने के बाद रिंकल गर्ग ने कहा- अलवर शहर के हालत बिगड़े हुए हैं। यहां काफी सुधार की जरूरत है। बीजेपी व कांग्रेस को पूर्ण बहुमत नहीं मिला था। इसलिए मैंने मेयर बनने का विचार किया। लेकिन फॉर्म भरने के बाद पता चला कि यहां हॉर्स ट्रेडिंग चल रही है। कैंडिटेड खरीद-फरोख्त कर रहे हैं। विजेता निर्दलीय कंडिडेट अपने दाम बता रहे हैं। लेकिन हम पैसे देकर किसी सीट पर नहीं आना चाहते हैं। वैसे कांग्रेस चाहती थी कि हम आएं। यदि खरीद-फरोख्त जिस तरह से हो रही है। उसके हिसाब से कांग्रेस अपना पूर्ण समर्थन नहीं ले पाएगी। वहीं, भिवाड़ी नगर परिषद के सभापति चुनाव में BJP से डॉक्टर गुंजन निर्विरोध सभापति बनी हैं। यहां कांग्रेस के प्रत्याशी गगन और निर्दलीय प्रत्याशी सीस राम ने नामांकन वापस ले लिया है। बता दें कि अलवर नगर निगम में नामांकन के पहले दिन कुल तीन दावेदारों ने फॉर्म भरा था, लेकिन नाम वापसी के बाद अब सीधा मुकाबला तय हो गया है। 21 सितंबर को होने वाली वोटिंग से अलवर के नए मेयर का फैसला होगा। उधर, भिवाड़ी नगर परिषद में बीजेपी ने निर्विरोध सभापति बना लिया। कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी व निर्दलीय प्रत्याशी दोनों ने नामांकन वापस ले लिया। बाड़ाबंदी का खेल: बीजेपी उत्तरकाशी में तो कांग्रेस जयपुर के रिसोर्ट में अलवर नगर निगम के जीते हुए ज्यादातर पार्षद इस समय बाड़ाबंदी में हैं। नामांकन के दिन भी बीजेपी और कांग्रेस के महज 4-4 पार्षद ही नजर आए, बाकी पार्षदों को चुनावी गहमागहमी से दूर रखा गया है। बीजेपी के पार्षद उत्तराखंड के उत्तरकाशी की तरफ बताए जा रहे हैं। कांग्रेस पार्षदों को जयपुर के आसपास किसी गुप्त रिसोर्ट में ठहराया गया है। आंकड़ों का गणित: किसके पास कितनी ताकत? 65 वार्डों वाले अलवर नगर निगम में बहुमत का आंकड़ा पाने के लिए दोनों पार्टियां जोर-आजमाइश कर रही हैं। बीजेपी के पास खुद के 28 पार्षद हैं। पार्टी का दावा है कि बहुमत से काफी अधिक संख्या में निर्दलीय पार्षद भी उनके साथ हैं। कांग्रेस के 23 पार्षद जीतकर आए हैं और वे भी निर्दलियों को अपने पाले में लाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग की ज्यादा आस है। उनको लगता है कि 2019 में भी कांग्रेस का चेयरमैन क्रॉस वोटिंग से ही जीता था। 13 निर्दलीय पार्षदों की भूमिका इस चुनाव में सबसे अहम मानी जा रही है। दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर: यह चुनाव केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और राजस्थान के वन राज्य मंत्री संजय शर्मा की साख का सवाल बन चुका है। दोनों दिग्गज नेता पल-पल की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी से सुमनलता अग्रवाल को मेयर प्रत्याशी बनाने का फैसला पार्टी हाईकमान ने तय किया है। वहीं कांग्रेस में भी राजस्थान के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली व पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह बराबर ढेरा जमाए हैं। जूली लगातार चुनावों के बाद से अलवर में हैं। एक एक पार्षद का गणित लगाने में लगे हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि 21 सितंबर को बाड़ाबंदी से निकलकर आने वाले पार्षद किसके पक्ष में मतदान करते हैं और अलवर नगर निगम का ताज किसके सिर सजता है। बाबा बालकनाथ बोले- हमने ही कांग्रेस से नामांकन कराया था भिवाड़ी में बीजेपी का निर्विरोध सभापति बनने के बाद तिजारा विधायक महंत बाबा बालकनाथ ने कहा कि भिवाड़ी में कोई कांग्रेस नहीं है। यहां सब बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने मिलकर चुनाव लड़ा था। यहां पूरी बीजेपी एक है। कांग्रेस में कोई नहीं है। यह बड़ा ऐतिहासिक काम हुआ है। प्रत्याशी गगन व शीशराम का धन्यवाद करता हूं। यह हमारा सुनियोजित कार्यक्रम था। हमने ही कांग्रेस से नामांकन कराया था। यह सब कार्यकर्ताओं के दम पर हुआ है। भिवाड़ी में इतिहास बना है। हमने सब ने भिवाड़ी की जनता का विश्वास जीता है। आगे सब मिलकर विकास भी करेंगे। अभी उप सभापति का चुनाव होना है। हम कोशिश करेंगे उप सभापति का चुनाव भी निर्विरोध हो।