सवाई माधोपुर में नगर निकायों के सभापति और अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले भाजपा की ओर से की जा रही कथित बाड़ेबंदी को लेकर कांग्रेस ने पुलिस प्रशासन से शिकायत की है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष एवं बामनवास विधायक इंदिरा मीणा के नेतृत्व में कांग्रेसियों ने डीएसपी राजेंद्र मीणा को ज्ञापन सौंपकर निर्दलीय और भाजपा पार्षदों को उनकी इच्छा के विरुद्ध ले जाकर बंधक बनाए रखने का आरोप लगाया। कांग्रेस ने दोनों पार्षदों को मुक्त कराने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। पार्षदों को दबाव में रखने का आरोप ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि नगर निकाय चुनाव के परिणाम आने के बाद दो निर्वाचित पार्षदों को उनकी इच्छा के विरुद्ध अन्य स्थानों पर ले जाया गया और सभापति चुनाव में एक पक्ष के समर्थन में मतदान के लिए दबाव बनाया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं ने दोनों पार्षदों के परिजनों की ओर से पुलिस प्रशासन को पूर्व में दी गई शिकायतों का भी हवाला दिया है। शिकायत के अनुसार, बौंली नगर पालिका के वार्ड नंबर 3 से निर्वाचित निर्दलीय पार्षद एवं उनके पति आशीष मित्तल को 14 सितंबर को मतगणना केंद्र से पुलिस की मौजूदगी में कथित रूप से जबरन ले जाया गया। आरोप है कि इसके बाद से परिजनों को आशीष मित्तल के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। शिकायत में उन्हें भाजपा के पक्ष में मतदान के लिए दबाव में रखने का आरोप लगाया गया है। इसी तरह खंडार क्षेत्र में सभापति पद के प्रत्याशी हंसराज बैरवा के बेटे और भाजपा से निर्वाचित पार्षद मानवेंद्र सिंह अकोदिया को भी कथित रूप से उनकी इच्छा के विरुद्ध लालसोट क्षेत्र में ले जाने और बंधक बनाए रखने का आरोप लगाया गया है। परिजनों के अनुसार, इस संबंध में पहले भी पुलिस प्रशासन को शिकायत दी गई थी। शिकायत में मानवेंद्र की सुरक्षा को लेकर उनके पिता की ओर से राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर किए जाने का भी उल्लेख किया गया है। भाजपा प्रदेश मंत्री समेत स्थानीय पदाधिकारियों पर आरोप ज्ञापन में भाजपा प्रदेश मंत्री सीताराम पोसवाल सहित कुछ स्थानीय पदाधिकारियों पर आशीष मित्तल को कथित रूप से अपने कब्जे में रखने का आरोप लगाया गया है। साथ ही दोनों पार्षदों को करोड़ों रुपए का प्रलोभन देने और धमकी या दबाव के जरिए सभापति चुनाव में मतदान प्रभावित करने के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का पक्ष सामने नहीं आया है। कांग्रेस ने पुलिस से दोनों पार्षदों के संबंध में तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने, मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज, वाहनों की आवाजाही, होटल-रिसॉर्ट सहित अन्य स्थानों के रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही परिजनों की ओर से पूर्व में दी गई शिकायतों पर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की भी समीक्षा करने की मांग की गई है।