बांसवाड़ा के श्यामपुरा जंगल के पास पिछले तीन-चार दिनों से आबादी वाले क्षेत्रों और गलियों में घूम रहे लेपर्ड को वन विभाग की टीम ने आखिरकार पकड़ लिया। रविवार सुबह करीब 4 बजे लेपर्ड पिंजरे में कैद हुआ। पिंजरे में बकरी बांधी गई थी। शिकार के लालच में लेपर्ड पिंजरे के अंदर पहुंचा और कैद हो गया। लेपर्ड के पकड़े जाने की खबर मिलते ही क्षेत्रवासियों ने राहत की सांस ली। 10 सितंबर को लगाया था पिंजरा लेपर्ड को पकड़ने के लिए वन विभाग ने 10 सितंबर को श्यामपुरा वन क्षेत्र में पिंजरा लगाया था। इसके बाद टीम लगातार लेपर्ड के मूवमेंट पर नजर रख रही थी। लेपर्ड की लगातार आवाजाही के कारण आसपास के इलाकों में लोगों में डर बना हुआ था। शाम होते ही घरों से निकलने में कतरा रहे थे लोग पिछले कई दिनों से लेपर्ड के आबादी क्षेत्र में घूमने से शहरवासियों में दहशत का माहौल था। लोग शाम ढलने के बाद घरों से निकलने में कतरा रहे थे। वहीं, बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी परिवार चिंतित थे। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद वन विभाग की टीम सक्रिय हुई और लेपर्ड को पकड़ने के लिए लगातार प्रयास शुरू किए। सुबह 4 बजे पिंजरे में फंसा लेपर्ड बांसवाड़ा रेंजर प्रवीण अहारी ने बताया कि उप वन संरक्षक बांसवाड़ा के दिशा-निर्देशानुसार वन विभाग की रेस्क्यू टीम और स्थानीय अधिकारियों की विशेष टीम बनाई गई थी। टीम ने लेपर्ड के मूवमेंट पर नजर रखते हुए रणनीति के तहत काम किया। रविवार सुबह करीब 4 बजे लेपर्ड श्यामपुरा वन क्षेत्र में लगाए गए पिंजरे में फंस गया। पिंजरे के एक हिस्से में बकरी बांधी गई थी। बकरी को शिकार बनाने के लालच में लेपर्ड पिंजरे में पहुंच गया और कैद हो गया। इसके बाद वन विभाग की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए लेपर्ड को सुरक्षित तरीके से जंगल क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया। ट्रैंकुलाइजर एक्सपर्ट और वनकर्मियों का रहा योगदान इस पूरे ऑपरेशन में ट्रैंकुलाइजर एक्सपर्ट, वनपाल और वन विभाग के अन्य कर्मचारियों का अहम योगदान रहा। लेपर्ड के पकड़े जाने के बाद स्थानीय निवासियों ने वन विभाग की टीम के प्रयासों की सराहना की।