बारां के 6 निकायों में मतदान पूरा होने के बाद राजनीतिक समीकरण बदलने का खेल शुरू हो गया है। यहां वोट भले ही मतदाता डालते हैं, लेकिन बोर्ड किसका बनेगा, यह नतीजों के बाद ही तय होता है। 210 वार्डों के नतीजे सोमवार 14 सितंबर को आएंगे। हालांकि, इससे पहले ही प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी का दौर शुरू हो चुका है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल अपने उम्मीदवारों को सुरक्षित जगहों पर भेज रहे हैं। साथ ही, वे 274 निर्दलीय प्रत्याशियों पर भी नजर रख रहे हैं। इन निर्दलीय प्रत्याशियों में बड़ी संख्या बागियों की है। ये सीसवाली, अटरू, मांगरोल और अंता में किंगमेकर की भूमिका में आ सकते हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तब तेज हुई जब मतदान के दौरान ही भाजपा की वार्ड 16 की प्रत्याशी गायब हो गईं। यह मामला कोतवाली पहुंचा और किडनैप का केस दर्ज हुआ। बाड़ेबंदी से पहले ही इस घटना ने सस्पेंस बढ़ा दिया। 2021 में हुआ था उलटफेर बारां में उलटफेर कोई नई बात नहीं है। दिसंबर 2021 में जिला परिषद की 25 सीटों में भाजपा के 13 और कांग्रेस के 12 सदस्य जीते थे, लेकिन जिला प्रमुख कांग्रेस की उर्मिला जैन भाया बन गईं। क्रॉस वोटिंग करने वाले का नाम आज तक सामने नहीं आया। इसी तरह दिसंबर 2020 में नगर परिषद बारां में कांग्रेस के 32, भाजपा के 21 और 7 निर्दलीय जीते थे। लेकिन सभापति चुनाव में कांग्रेस को 40 वोट मिले। अंता में 16-16 की बराबरी के बाद एक निर्दलीय चेयरमैन बन गया था। इस बार मुकाबला त्रिकोणीय है। आम आदमी पार्टी के आने और निर्दलीयों की सक्रियता ने गणित को उलझा दिया है।