बारां शहर में जलझूलनी एकादशी पर आस्था, परंपरा और शौर्य का अनोखा संगम देखने को मिला। हाड़ौती की प्रसिद्ध डोल शोभायात्रा के साथ ही 18 दिवसीय डोल मेले की शुरुआत हो गई। जलझूलनी एकादशी पर शहर के अलग-अलग मंदिरों से 58 देव विमान शोभायात्रा में शामिल हुए। शोभायात्रा से पहले ही शहर का माहौल भक्ति से भर गया था। अलग-अलग रास्तों से 11 अखाड़ों के पहलवान प्रताप चौक पहुंचे। प्रताप चौक पर पहलवानों ने तलवारबाजी, लाठी और पारंपरिक हथियारों के करतब दिखाकर लोगों का मनोरंजन किया। शोभायात्रा श्रीजी चौक से शुरू हुई, जहां तीन अलग-अलग दिशाओं से आए देव विमान एक साथ हुए। यह शोभायात्रा चौमुखा बाजार, सर्राफा बाजार, सदर बाजार, धर्मादा चौराहा और मांगरोल रोड होते हुए डोल तालाब की पाल पर पहुंची। रास्ते में जगह-जगह फूल बरसाकर स्वागत किया गया। हजारों श्रद्धालु सड़कों, छतों और बालकनियों से दर्शन के लिए मौजूद रहे। शोभायात्रा में सबसे खास चौमुखा बाजार में श्रीजी और रघुनाथजी का मिलन रहा। जब कल्याणरायजी महाराज का विमान रघुनाथजी के विमान के सामने पहुंचा, तो दोनों का मिलन हुआ। जयकारों से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। मिलन के बाद रघुनाथजी का विमान दौड़ लगाते हुए डोल तालाब पहुंचा। डोल तालाब की पाल पर सभी देव विमानों का जलवा पूजन किया गया, जिसके साथ ही 18 दिवसीय मेले की औपचारिक शुरुआत हुई।