बड़ीसादड़ी में रविवार को आस्था और वात्सल्य का एक अनोखा संगम देखने को मिला। यहां तपस्वी मोहित मोनू ने 11 दिन का उपवास पूरा किया। उनकी महज एक साल की बेटी यशस्वी ने अपने नन्हे हाथों से पिता को नवकारसी का जल पिलाकर उनका पारणा कराया। इस दृश्य को देखकर पारणा समारोह में मौजूद परिवारजन, रिश्तेदार और मित्र भावुक हो उठे। जैन धर्म में तपस्या, संयम और त्याग को आत्मशुद्धि का श्रेष्ठ मार्ग माना गया है। मोहित मोनू ने 11 दिनों तक अन्न-जल का त्याग कर यह कठिन तपस्या पूरी की। तपस्या पूरी होने के बाद पारणा समारोह में जैसे ही नन्ही यशस्वी ने अपने पिता को नवकारसी का जल पिलाया, वहां का माहौल भक्ति और खुशी से भर गया। इस भावुक पल को मौजूद लोगों ने अपने कैमरों में कैद किया। पारणा के दौरान जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। मित्र मंडली ने तपस्वी मोहित का माला, शॉल और मेवाड़ी पगड़ी पहनाकर सम्मान किया। सभी ने तपस्वी के सुख और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए उनके कठिन तप की सराहना की। परिवारजनों ने बताया कि 11 दिनों की यह तपस्या काफी चुनौतीपूर्ण थी। जैन दिवाकर गुरु और महासाध्वी अपर्ण प्रज्ञा के आशीर्वाद और आत्मसंयम के बल पर मोहित ने यह तपस्या पूरी की। नन्ही बेटी यशस्वी द्वारा कराया गया पारणा इस धार्मिक आयोजन का सबसे भावुक और यादगार पल बन गया। इसी अवसर पर दोपहर में जैन दिवाकर सामायिक भवन में चौबीसी का आयोजन भी किया गया। यह आयोजन सकल जैन समाज की श्राविकाओं के लिए मेहता परिवार की ओर से था। कार्यक्रम में मेहता परिवार ने सभी श्राविकाओं को प्रभावना बांटी।