बाड़मेर में शारदीय नवरात्र की शुरूआत के साथ मंदिरों में भक्त दर्शन करने के लिए पहुंच रहे है। इधर घर-घर घट स्थापना भी की गई है। शहर के मुख्य मंदिरों में अलसुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी है। मंदिरों में खास सजावटी की गई है। इस बीच शहर का गढ़ मंदिर में आकर्षक रोशनी से सजाया गया है। इसी के साथ एतिहायत के तौर पर मंदिर और आसपास में पुलिस जाब्ता तैनात किया गया है। गढ़ मंदिर में नवरात्र को लेकर खास व्यवस्थाएं शारदीय नवरात्रा 11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक रहेंगे। जिसे लेकर शहर के पहाड़ों पर स्थित गढ़ मंदिर के पट सुबह 4:30 बजे खोल दिए गए। दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी लाइन लगी रही। मां के जयकारों के साथ कई भक्त दर्शन के लिए यहां पहुंचे। गढ़ मंदिर के अलावा मेढ़ स्वर्णकार जगदंबा मंदिर, हिंगलाज मंदिर सहित कई शक्तिपीठों में भी सुबह से भीड़ लगी रही। श्रद्धालुओं ने देवी के दर्शन कर खुशहाली की कामना की। मंदिरों को फूल-मालाओं से सजाया गया चौहटन कस्बे के वांकल माता मंदिर के अलावा वीरातरा ट्रस्ट के गढ़ मंदिर, जूना वीरातरा माताजी मंदिर, वैर माता मंदिर, तोरणिया माता मंदिर, रोहिड़ा माता मंदिर, बाणमाता मंदिर, तथा भींयानाडी की छतरी पर भी पूजा-अर्चना शुरू हुई। जहां मां को विशेष फूल मालाओं से सजाया गया। वांकल धाम में नवरात्रा स्थापना पर मां के दर्शन करने दूर-दूर से सुबह से ही पैदल जत्थे और वाहनों से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। बाड़मेर शहर की प्रहरी माताजी 16वीं शताब्दी में रावत भीमाजी ने पहाड़ी पर गढ़ जोगमाया मंदिर की स्थापना की थी। इससे पहले बाड़मेर की स्थापना बहाड़ राव की ओर से जूना नाम की जगह पर की गई थी। बाद में जब शहर को नई जगह बसाया गया, तो सबसे पहले मंदिर की स्थापना की गई। तभी से यह मंदिर शहर की सुरक्षा का केंद्र बना गया। 1965 और 1971 में पाकिस्तान ने बाड़मेर को टारगेट बनाया था, माना जाता है कि तब गढ़ जोगमाया की कृपा से शहर को नुकसान नहीं हुआ था। लोग रात को माताजी के मंदिर की तलहटी में सोते थे।