ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार बाड़मेर में मुख्य जगहों पर सायरन का ट्रायल किया गया। गुरुवार को पूरे दिन शहर में अलग-अलग समय में तीन-चार बार सायरन गूंज सुनाई दी। यह परीक्षण पीजी कॉलेज, पुलिस लाइन, गांधी चैक समेत मुख्य स्थानों पर सायरन बजाया गया। प्रशासन ने पहले ही लोगो को ट्रायल का मैसेज दे दिया था। दरअसल, भारत सरकार के गृह मंत्रालय के महानिदेशालय अग्निशमन सेवा, नागरिक सुरक्षा एवं गृह रक्षक की स्पेशल टीम सायरन का ट्रायल किया गया। एडीएम रवींद्र कुमार ने एक दिन पहले बताया था कि पूरे शहर में सायरन सुनाई देगा। उन्होंने अपील की थी कि आमजन इसे किसी भ्रम या अफवाह की तरह नहीं लें। गुरुवार को नागरिक सुरक्षा एवं गृह रक्षक की स्पेशल टीम ने बाड़मेर शहर में अलग-अलग जगह लगे सायरन का ट्रायल किया गया। टीम ने सायरन सिस्टम के अलग-अलग तकनीकी पहलुओं की ट्रायल कर बारीकी से जांच की गई। इसका मुख्य मकसद सायरन की आवाज केपिसिटी, कार्यप्रणाली, तकनीकी कनेक्टिविटी को जांचा गया। ताकि जरूरत पड़ने पर एक सिस्टम से अलग-अलग स्थानों पर लगे सायरनों को एक्टिव किया जा सके। किसी संभावित आपात स्थिति में समय रहते लोगों को सतर्क किया जा सके। नई तकनीकी से जोड़ कर देखा जा रहा है बाड़मेर में अलग-अलग जगह जगहों पर लगे सायरन सिस्टम को एक्टिव किया। इस ट्रायल का एक मकसद यह भी है कि इसको नई टेक्नॉलाजी से इसको जोड़ना भी माना जा रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार ट्रायल किया गया है।