कस्बे में धार्मिक वातावरण के बीच मंगलवार को श्री सीताराम जी के बड़े मंदिर में श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ कथा का शुभारंभ हुआ। कथा आयोजन से पहले छतरी वाले बालाजी मंदिर से कलशयात्रा निकाली गई। कलशयात्रा छतरी वाले बालाजी मंदिर से प्रारंभ होकर निर्धारित मार्ग से होते हुए श्री सीताराम जी के बड़े मंदिर पहुंची। वातावरण भगवान के जयकारों से गूंजता रहा। कलशयात्रा में श्याम सुंदर स्वर्णकार ने श्रीमद्भागवत पोथी धारण की। वहीं रघुबीर जाट, मूल सिंह राजपूत, रूपसिंह राजपूत, मनीष शर्मा, दिलखुश जाट, राम हरि जाट एवं बद्रीलाल जाट झंडा लेकर यात्रा के आगे चले। मंदिर पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की और कथा स्थल पर धार्मिक अनुष्ठान किए। भागवत ज्ञान यज्ञ के प्रथम दिन कथा वाचक आचार्य प्रभुदास महाराज ने गणेश जी की पूजा-अर्चना की। इसके साथ ही कथा मंडल में विराजमान सभी देवी-देवताओं का पूजन किया गया। इसके बाद महाराज ने श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा के महत्व के बारे में बताया। आचार्य प्रभुदास महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण मनुष्य के जीवन को आध्यात्मिक दिशा देने वाला है। कथा के माध्यम से भगवान की भक्ति के साथ व्यक्ति को अपने जीवन में अच्छे संस्कार, सत्य, सदाचार और परोपकार अपनाने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा का उद्देश्य केवल कथा सुनना नहीं, बल्कि कथा में बताए गए संदेशों को अपने जीवन में उतारना भी है। श्रद्धालुओं ने पूरे भक्तिभाव के साथ महाराज के प्रवचन सुने। रोजाना चार घंटे होगी कथा आयोजन समिति के अनुसार श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ कथा रोज दोपहर 12 से शाम 4 बजे तक किया जाएगा। कथा में रोज श्रीमद्भागवत के विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक प्रसंगों का वाचन किया जाएगा। इस दौरान श्रद्धालुओं को भगवान की भक्ति, धर्म, संस्कार और जीवन मूल्यों से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से आध्यात्मिक संदेश दिया जाएगा। कथा 21 सितंबर तक चलेगा। इसी दिन पूर्णाहुति होगी।