खुद को शहर की राजनीति का सरताज साबित करने के लिए भाजपा में विधायक जयदीप बिहाणी और अशोक चांडक के बीच मतदान के बाद जोर-आजमाइश तेज हो गई है। सभापति बनाने में अपनी भूमिका अहम साबित करने के लिए बिहाणी और चांडक ने उम्मीदवारों की बाड़ेबंदी शुरू कर दी है। भाजपा में यह स्पष्ट हो गया है कि सभापति पद का उम्मीदवार चाहे कोई हो, किंगमेकर की भूमिका में विधायक बिहाणी या अशोक चांडक में से कोई एक ही होगा। भाजपा खेमे ने कई निर्दलीयों को भी बाड़ेबंदी में शामिल किया है। कांग्रेस अभी वेट एंड वॉच की स्थिति में है। शनिवार को कांग्रेस की समीक्षा बैठक होगी। उसके बाद बाड़ेबंदी का निर्णय लिया जाएगा। नगरपरिषद चुनाव 2019 में भी भाजपा और कांग्रेस ने चुनाव के तुरंत बाद उम्मीदवारों की बाड़ेबंदी कर ली थी। भाजपा में टिकटों की सूची आते ही विधायक बिहाणी और चांडक खेमे में वर्चस्व साबित करने के लिए रस्साकशी शुरू हो गई थी। दोनों खेमों ने अपने उम्मीदवारों को हाथ से फिसलने से बचाने के लिए पहले ही योजना बना ली थी। शुक्रवार को शाम 6 बजे मतदान संपन्न होने से एक घंटा पहले ही उम्मीदवारों को साथ ले लिया गया। 14 दोपहर तक हो जाएगी छंटनी: फिलहाल भाजपा सभी उम्मीदवारों और संभावित जिताऊ उम्मीदवारों को बाड़ेबंदी में कवर कर रही है। विधायक के समर्थक उम्मीदवारों की विधायक सेवा केंद्र पर हुई बैठक में संभावित चुनावी नतीजों पर चर्चा हुई। चांडक समर्थक उम्मीदवार अशोक चांडक के निवास पर पहुंचे। यहां सभापति पद के चुनाव की रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया। मतगणना 14 सितंबर को होगी। तब बाड़ेबंदी में रखे भावी पार्षदों की छंटनी हो जाएगी। हारे हुए उम्मीदवारों को घर भेज दिया जाएगा। जिताऊ उम्मीदवार बाड़ेबंदी में रहेंगे। अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि प्रत्याशियों को बाड़ेबंदी कर कहां ले जाए गया है। हां, नोहर से एक पार्टी अपने प्रत्याशियों को सालासर लेकर गई है। शुक्रवार को चर्चा रही कि शहर के पांच ऐसे वार्ड जहां भाजपा का मुकाबला निर्दलीयों से था, उनमें अंदरखाते कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने भाजपा प्रत्याशियों को वोट डलवाए ताकि निर्दलीय न जीत पाए।