कोरोनाकाल के समय पिछले पंचायती राज चुनावों में मतदाताओं ने जिला परिषदों में भाजपा को बढ़त दी थी। वहीं जमीनी स्तर यानी पंचायत समितियों में कांग्रेस का पलड़ा भारी रहा था। उस समय 33 जिलों में हुए जिला प्रमुख के चुनावों में भाजपा ने स्पष्ट बढ़त हासिल करते हुए 17 जिलों में अपने जिला प्रमुख बनाए थे। कांग्रेस ने 13 जिलों में जीत दर्ज कर दूसरे स्थान पर रही, जबकि 3 जिलों में निर्दलीय व अन्य उम्मीदवारों ने बाजी मारी थी। जिला परिषद के कुल 1014 वार्डों में भाजपा ने 505 सीटों पर जीत दर्ज की, जो बहुमत के आंकड़े (508) के बेहद करीब थी। कांग्रेस ने 456 वार्डों में सिमट गई । उस समय निर्दलीय प्रत्याशी 53 वार्ड जीतकर निर्णायक भूमिका में थे । जिन्होंने जिला प्रमुख के चुनाव में किंगमेकर की भूमिका निभाई। आंकड़ों से साफ है कि भाजपा ने लगभग 50% वार्ड जीतकर जिला स्तर पर अपना दबदबा साबित किया। प्रधान चुनाव: ग्रासरूट पर कांग्रेस की मजबूत वापसी जिला स्तर पर पिछड़ने के बावजूद कांग्रेस ने पंचायत समितियों में जबर्दस्त वापसी की। प्रदेश की 352 पंचायत समितियों में कांग्रेस ने 180 प्रधान बनाए, जबकि भाजपा महज 139 प्रधान ही बना सकी। वहीं 33 पंचायत समितियों में अन्य काबिज हुए। पंचायत समितियों के कुल 6992 वार्डों में कांग्रेस ने 3003 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा 2872 सीटों पर रही। स्थानीय समीकरणों और निर्दलीय सदस्यों के सहयोग से कांग्रेस ने प्रधान पदों की कुल हिस्सेदारी में 51% से अधिक पर कब्जा कर जमीनी स्तर पर अपनी मजबूत पकड़ दर्ज कराई। उस समय 1117 सीटों पर अन्य और निर्दलीय प्रत्याशियों ने कब्जा जमाया था। पिछले जिला प्रमुख चुनाव की स्थिति जिला प्रमुख चुनाव : 33 जिलों में 17 सीटें भाजपा ने जीती। कांग्रेस ने 13 जीती थी। तीन में अन्य जीते थे। जिला परिषद : 1014 वार्ड में 505 भाजपा, कांग्रेस 456 और 53 अन्य थे। प्रधान का चुनाव : 352 पंचायत समितियों में 139 भाजपा 180 कांग्रेस व 33 अन्य प्रधानों बने थे। पंचायत समिति के 6992 वार्डों में से 2872 भाजपा, कांग्रेस 3003, अन्य 1117 थे।