पंचायतीराज चुनाव में जिला प्रमुख का पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित होने के बाद भाजपा की टिकट वितरण सूची में राजनीतिक परिवारों की भूमिका चर्चा में है। जिला परिषद के 41 वार्डों में टिकट बांटने के दौरान कहीं पूर्व सांसदों की पुत्रवधुओं को मौका मिला है तो कहीं पूर्व विधायक की बेटी, युवा मोर्चा अध्यक्ष की पत्नी और दूसरे वरिष्ठ नेताओं के परिवारों से जुड़ी महिलाओं को टिकट दिया गया है। टिकट वितरण में नेताओं का राजनीतिक अनुभव, संगठन में सक्रियता और स्थानीय स्तर पर दावेदारी के साथ परिवारों की पसंद भी चर्चा में है। पूर्व सांसद नरेंद्र कुमार अपनी दो पुत्रवधुओं को टिकट दिलाने में कामयाब रहे। निवर्तमान जिला प्रमुख हर्षिनी कुलहरी को वार्ड 5 और अनामिका पूनियां को वार्ड 6 से प्रत्याशी बनाया गया है। दोनों पूर्व सांसद नरेंद्र कुमार की पुत्रवधुएं हैं। हर्षिनी कुलहरी पहले जिला प्रमुख रह चुकी हैं। ऐसे में उनकी उम्मीदवारी को उनके राजनीतिक अनुभव से जोड़कर भी देखा जा रहा है। वहीं, अनामिका पूनियां को टिकट मिलने से एक ही परिवार की दो महिलाएं अलग-अलग वार्डों से चुनाव मैदान में हैं। पूर्व सांसद संतोष अहलावत की पुत्रवधू और पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी की बेटी दीक्षा अहलावत को वार्ड 18 से टिकट दिया गया है। इस तरह दीक्षा अहलावत का जुड़ाव दो राजनीतिक परिवारों से है। उनके नाम की घोषणा के बाद टिकट वितरण में राजनीतिक रिश्तों की भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। उनके मामले में पूर्व सांसद की पुत्रवधू और पूर्व विधायक की बेटी होने, दोनों बातों को राजनीतिक नजरिए से देखा जा रहा है। युवा मोर्चा अध्यक्ष की पत्नी और नेताओं की बेटियों को भी टिकट भाजपा की सूची में पूर्व सांसदों और विधायकों के परिवारों के अलावा संगठन के पदाधिकारियों और दूसरे नेताओं के परिवारों से जुड़ी महिलाओं को भी टिकट मिला है। पूर्व युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष और किसान मोर्चा के प्रदेश प्रवक्ता सतीश गजराज की पत्नी मीनू गजराज को वार्ड 29 से उम्मीदवार बनाया गया है। वार्ड 3 से राजेश बाबल की पत्नी पूजा बाबल को टिकट दिया गया है। भाजपा की केंद्रीय समिति के सदस्य की बेटी नेहा को भी उम्मीदवार बनाया गया है। सूरजगढ़ के पूर्व विधायक सुभाष पूनियां के परिवार से जुड़ी सविता पूनियां को वार्ड 35 से टिकट दिया गया है। वहीं, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष और पूर्व उप जिला प्रमुख बनवारीलाल सैनी को वार्ड 41 से प्रत्याशी बनाया गया है। महिला आरक्षण से बदला टिकट वितरण का सियासी गणित जिला प्रमुख का पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित है। ऐसे में जिला परिषद चुनाव में टिकट वितरण को जिला प्रमुख पद की संभावित दावेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक परिवारों से जुड़ी महिलाओं को टिकट मिलने के बाद यह चर्चा भी है कि जिला प्रमुख की कुर्सी को लेकर पार्टी के अलग-अलग नेताओं की क्या रणनीति है। भाजपा की सूची में राजनीतिक परिवारों की महिलाओं को प्रमुखता से टिकट मिलने के बाद महिला प्रतिनिधित्व के साथ राजनीतिक विरासत का मुद्दा भी चर्चा में है। हालांकि, टिकट मिलने का मतलब यह नहीं है कि किसी उम्मीदवार की जिला प्रमुख पद पर दावेदारी तय हो गई है। फिर भी इन नामों को जिला प्रमुख पद के संभावित दावेदारों और राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से देखा जा रहा है। वार्ड 20 पर अलग-अलग पसंद, टिकट वितरण पर नहीं बनी सहमति भाजपा की टिकट सूची में वार्ड 20 का मामला भी चर्चा में है। पार्टी ने इस वार्ड से अभी प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निवर्तमान जिला प्रमुख हर्षिनी कुलहरी जिला उपाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह की पत्नी को टिकट दिलाना चाहती थीं। वहीं, पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी अंतिम समय तक पार्टी कार्यकर्ता अजय भालोठिया की बेटी निकिता के लिए पैरवी कर रहे थे। वार्ड 20 से टिकट के लिए दो अलग-अलग नाम सामने आने के बाद प्रत्याशी के चयन पर सहमति नहीं बन सकी और पार्टी ने इस वार्ड से उम्मीदवार घोषित नहीं किया। नेताओं की अलग-अलग पसंद के कारण यह मामला भी भाजपा के भीतर चर्चा का विषय बना हुआ है।