बूंदी के डाबी बरड़ क्षेत्र में महात्मा गांधी राजकीय अंग्रेजी माध्यम स्कूल के पास वन विभाग का एक पुराना भवन और एक पुराना पटवार घर पांच साल से ज्यादा समय से खाली पड़े हैं। ये भवन अब जर्जर होकर खंडहर बन रहे हैं। स्थानीय लोगों ने इनको स्कूल को देने की मांग की है। इसके लिए जिला प्रशासन को लेटर लिखा है। उन्होंने बताया- स्कूल में 431 विद्यार्थियों के लिए केवल 11 कमरे हैं। इस वजह से बच्चों को बरामदे में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। विद्यालय प्रशासन के अनुसार महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय डाबी में नर्सरी से 12वीं तक कुल 15 कक्षाएं चल रही हैं। यहां 431 विद्यार्थी पढ़ते हैं। कक्षाएं केवल 11 कमरों में लगती हैं। इसी सत्र से 11वीं और 12वीं में विज्ञान संकाय भी शुरू हो गया है। इसके लिए भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान की प्रयोगशालाओं की बहुत जरूरत है। लेकिन स्कूल परिसर में जमीन नहीं होने के कारण इनका निर्माण रुका हुआ है। स्थानीय भामाशाहों और ग्रामीणों ने इस पर चिंता जताई है। पूर्व सरपंच फूलचंद जैन, पूर्व उपसरपंच गजराज सिंह हाड़ा, संजय पोखरना, सुरेश धनोपिया और भाजपा मंडल अध्यक्ष सत्यनारायण सोलंकी ने बताया कि बालिका विद्यालय के पास वन विभाग का भवन कई सालों से किसी काम नहीं आ रहा है। इसी तरह अंग्रेजी माध्यम स्कूल के पास का पुराना पटवार घर भी बंद पड़ा है। विद्यालय प्रशासन ने बूंदी जिला प्रशासन को पत्र लिखकर स्कूल के सामने स्थित वन विभाग की अनुपयोगी जमीन विद्यालय को हस्तांतरित करने की मांग की है। प्रधानाचार्य का कहना है कि जमीन मिलते ही स्थानीय भामाशाहों और जनसहयोग से और कमरे बनवा दिए जाएंगे। अब अभिभावकों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जर्जर भवनों को नियमों के हिसाब से हटाकर दोनों खाली भूखंड विद्यालय को दिए जाएं। इससे खाली पड़ी सरकारी जमीन का सही इस्तेमाल हो सकेगा और बच्चों के भविष्य के लिए स्थायी हल निकल सकेगा।