बूंदी के ऐतिहासिक कजली तीज मेले में शनिवार रात कुम्भा स्टेडियम में राजस्थानी-हाड़ौती कवि सम्मेलन हुआ। जिला प्रशासन और नगर परिषद ने इसका आयोजन किया था। इस कार्यक्रम में हास्य, व्यंग्य, श्रृंगार और राष्ट्रभक्ति की कविताओं ने दर्शकों को देर रात से भोर तक बांधे रखा। कवियों के हास्य-व्यंग्य पर पूरा स्टेडियम ठहाकों से गूंज उठा। वहीं, राष्ट्रभक्ति की कविताओं ने माहौल में उत्साह भर दिया। शहर के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों से भी बड़ी संख्या में लोग कवि सम्मेलन सुनने पहुंचे। देर रात तक स्टेडियम दर्शकों से भरा रहा। मायड़ भाषा और हाड़ौती की कविताओं ने स्थानीय संस्कृति को और जीवंत बना दिया। कवि सम्मेलन में मंच संचालक प्रेम शास्त्री कोटा, वरिष्ठ हास्य गीतकार बाबू बंजारा बारां, अल्हड़ हास्य गीतकार गिरिराज आमेटा मोड़क, श्रृंगार गीतकार विष्णु विश्वास अंता, हास्य कवि अंदाज हाड़ौती करवर, हास्य रस के गिरिजेश वैष्णव रामगंजमंडी, प्रखर राष्ट्रवादी ओजस्वी कवि परमानंद दधीच कामखेड़ा और हास्य कवि पीयूष पाचक बूंदी ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। कवियों ने हाड़ौती और राजस्थानी में सामाजिक मुद्दों, रोजमर्रा के जीवन और मौजूदा विषयों पर अपनी कविताएं सुनाईं। दर्शकों ने इन पर जमकर ठहाके लगाए और तालियों से उनका उत्साह बढ़ाया। जिला प्रशासन और नगर परिषद की ओर से की गई बैठने की व्यवस्था, मंच और रोशनी के इंतजामों की शहरवासियों ने तारीफ की। इतनी बड़ी भीड़ होने के बावजूद कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से पूरा हुआ। कजली तीज मेले के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में यह कवि सम्मेलन बूंदी के लोगों के लिए एक खास रात बन गया।