चित्तौड़गढ़ दुर्ग के प्राकृतिक रूप से उगने वाले सीताफल इस बार अपनी मिठास के साथ कारोबारियों के लिए भी उम्मीद लेकर आए हैं। कम बारिश से पेड़ों पर फल ज्यादा और बेहतर क्वालिटी के दिखाई दे रहे हैं। इसी उम्मीद का असर है कि पुरातत्व विभाग के क्षेत्र में लगे सीताफल के पेड़ों का ठेका पिछले साल के 2.33 लाख रुपए के मुकाबले बढ़कर 3.61 लाख रुपए में छूटा है। कारोबार से जुड़े लोगों को इस बार अच्छी पैदावार के साथ बाजार में बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है। दुर्ग के बाहर सड़क किनारे और अन्य क्षेत्रों में लगे सीताफल के पेड़ राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज हैं। इनकी नीलामी अब तहसील कार्यालय की ओर से की जाएगी। दुर्ग में प्राकृतिक रूप से उगे हैं पेड़ पुरातत्व विभाग के उद्यान सहायक प्रथम राकेश कुमार वर्मा ने बताया - करीब 14 किमी क्षेत्र में फैले चित्तौड़गढ़ दुर्ग में बड़ी संख्या में सीताफल के पेड़ प्राकृतिक रूप से उगे हैं। इन पेड़ों को लगाया नहीं गया, बल्कि समय के साथ ये अपने आप विकसित हुए हैं। दुर्ग के अंदर बाड़ों में लगे पेड़ों के फलों की नीलामी हर साल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग करता है। जुलाई-अगस्त से फलों की शुरुआत होती है और दीपावली के आसपास बिक्री शुरू हो जाती है। चित्तौड़गढ़ के सीताफल की मांग स्थानीय बाजार के साथ दूसरे क्षेत्रों में भी रहती है। कई पर्यटक भी इन्हें खरीदकर अपने साथ ले जाते हैं। पुरातत्व विभाग ने पूरी की नीलामी, अब मंजूरी का इंतजार पुरातत्व विभाग के उद्यान सहायक प्रथम राकेश कुमार वर्मा ने बताया कि दुर्ग के अंदर आने वाले सीताफल के पेड़ों की नीलामी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इस बार सरकार की ओर से 2.75 लाख रुपए की आरक्षित बोली तय की गई थी। नियम के अनुसार इससे ज्यादा बोली लगाने वालों को ही मौका दिया गया। अंतिम बोली 3.61 लाख रुपए तक पहुंची। यह प्रस्ताव मंजूरी के लिए जोधपुर सर्किल भेज दिया गया है और एक-दो दिन में इसकी स्वीकृति मिलने की संभावना है। इस बार दुर्ग निवासी मनीष शर्मा को ठेका मिला है। विभाग का कहना है कि बोली में हुई बढ़ोतरी साफ बता रही है कि व्यापारियों को इस बार अच्छी फसल और अच्छे कारोबार की उम्मीद है। पिछले साल की तुलना में ठेके की राशि में करीब 1.28 लाख रुपए की बढ़ोतरी अपने आप में इस बात का संकेत है कि इस बार सीजन बेहतर रहने वाला है। कम बारिश से फसल को फायदा वर्मा ने बताया कि इस बार कम बारिश के कारण सीताफल की फसल को फायदा होने की उम्मीद है। ज्यादा बारिश में कई बार कलियां और फल प्रभावित हो जाते हैं, जबकि इस बार पेड़ों पर अच्छी संख्या में फल दिखाई दे रहे हैं। बीमारी कम रहने और फलों का आकार अच्छा होने से क्वालिटी बेहतर रहने की संभावना है। इस बार दुर्ग निवासी मनीष शर्मा को ठेका मिला है। हालांकि अगर अब बारिश नहीं भी होती है, तब भी इस बार की फसल पिछले साल से बेहतर रहने की पूरी संभावना है। उन्होंने बताया कि जब लगातार तेज बारिश होती है तो कलियां जल्दी पक जाती हैं, कई फल कच्चे ही गिर जाते हैं और उनकी क्वालिटी भी खराब हो जाती है। इससे बाजार में सही कीमत नहीं मिलती। इस बार ऐसी स्थिति नहीं बनी है, इसलिए अच्छी क्वालिटी के सीताफल मिलने की उम्मीद है। तहसील क्षेत्र के पेड़ों की अब होगी नीलामी दुर्ग के बाहर सड़क किनारे और अन्य क्षेत्रों में लगे सीताफल के पेड़ राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज हैं। इनकी नीलामी तहसील कार्यालय की ओर से की जाती है। तहसीलदार बनवीर सिंह राठौड़ ने बताया - पिछले दिनों नगर निकायों के चुनाव और उसके बाद पंचायती चुनावों की प्रक्रिया चलने के कारण इस बार तहसील क्षेत्र के पेड़ों की नीलामी फिलहाल नहीं हो सकी है। चुनावी काम पूरा होने के बाद नई तारीख घोषित कर नीलामी कराई जाएगी।