चित्तौड़गढ़ में प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अब पढ़ाई का बेहतर विकल्प तैयार हो गया है। सूचना केंद्र में शुरू हुई आधुनिक ई-लाइब्रेरी केवल किताबें पढ़ने की जगह नहीं, बल्कि ऐसा स्टडी सेंटर बन गई है जहां स्टूडेंट्स को शांत माहौल के साथ डिजिटल सुविधाएं भी मिल रही हैं। यहां करीब 100 छात्र-छात्राएं नियमित अध्ययन कर रहे हैं। कोई प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा है तो कोई अपनी नियमित पढ़ाई पर फोकस कर रहा है। लाइब्रेरी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि स्टूडेंट्स को अब अच्छी पढ़ाई के लिए महंगे निजी संस्थानों या दूसरे शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। पढ़ाई के लिए जरूरी माहौल और आधुनिक संसाधन एक ही जगह उपलब्ध हो रहे हैं। एक ही जगह पढ़ाई की सभी जरूरी सुविधाएं जिला कलेक्टर डॉ. मंजू ने बताया कि इस ई-लाइब्रेरी को इस तरह तैयार किया गया है कि स्टूडेंट्स को पढ़ाई के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो। यहां इंटरनेट, वाई-फाई, स्मार्ट टीवी, एसी, सीसीटीवी कैमरे और लगातार बिजली के लिए इन्वर्टर जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। छात्र और छात्राओं के लिए अलग-अलग अध्ययन कक्ष बनाए गए हैं। लाइब्रेरी के बाहर भी बैठने की व्यवस्था की गई है ताकि जरूरत पड़ने पर स्टूडेंट्स वहां भी अध्ययन कर सकें। साफ-सफाई और शांत माहौल पर विशेष ध्यान दिया गया है। इससे स्टूडेंट्स बिना किसी परेशानी के लंबे समय तक पढ़ाई कर सकते हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी कर सकते हैं। अब गांवों तक पहुंचेगी यह सुविधा जिला कलेक्टर डॉ. मंजू ने जिले में 150 ई-लाइब्रेरी विकसित करने का लक्ष्य तय किया है। इसकी शुरुआत सूचना केंद्र से हो चुकी है और अब इस मॉडल को उपखंडों और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने की तैयारी है। उनका कहना है कि गांवों के स्टूडेंट्स को भी शहर जैसी अध्ययन सुविधाएं मिलनी चाहिए। ई-लाइब्रेरी के जरिए स्टूडेंट्स को ई-बुक्स, डिजिटल स्टडी मटेरियल और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी सामग्री आसानी से उपलब्ध कराई जाएगी। इससे शहर और गांव के बीच पढ़ाई के संसाधनों का अंतर कम होगा और ग्रामीण युवाओं को अपने क्षेत्र में ही बेहतर तैयारी का मौका मिलेगा। शिक्षा में समाज की भागीदारी भी बढ़ाने पर जोर जिला कलेक्टर डॉ. मंजू के अनुसार शिक्षा सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी भागीदारी जरूरी है। इसी सोच के साथ स्कूल्स में सहयोग करने वाले भामाशाहों और दानदाताओं को सम्मानित करने की पहल शुरू की गई है। पिछले एक महीने में दो बार शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग करने वाले लोगों का सम्मान किया जा चुका है। उनका मानना है कि जब किसी व्यक्ति के योगदान को सम्मान मिलता है तो दूसरे लोग भी स्कूलों में फर्नीचर, डिजिटल उपकरण, पुस्तकें, कक्षा-कक्ष और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए आगे आते हैं। प्रशासन का उद्देश्य आधुनिक अध्ययन संसाधन उपलब्ध कराने के साथ समाज को भी शिक्षा से जोड़ना है, ताकि आने वाले समय में जिले के ज्यादा से ज्यादा स्टूडेंट्स को बेहतर माहौल और गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई का अवसर मिल सके।