राहुल, खरगे की मंजूरी का इंतजार निकाय चुनावों में हार से सबक लेते हुए कांग्रेस ने पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव नए अंदाज में लड़ने की रणनीति बनाई है। प्रदेश के 309 निकायों में से 200 में भाजपा की जीत के बाद कांग्रेस ने अपनी चुनावी रणनीति में बदलाव किया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी कह चुके हैं कि कांग्रेस रोड शो, बड़ी सभाएं और रैलियां करती तो निकाय चुनाव में बेहतर परिणाम आते। इसके बाद कांग्रेस ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) स्तर पर कई बदलाव करने का निर्णय लिया। अब पंचायत चुनाव में प्रदेश स्तर के नेताओं के साथ राष्ट्रीय स्तर के स्टार प्रचारकों को भी गांवों में उतारने की तैयारी है। पहले चरण में प्रदेश स्तर के 20 स्टार प्रचारक तय किए गए हैं। इसके बाद प्रदेश के करीब 20 और नेताओं को स्टार प्रचारक बनाया जा सकता है। साथ ही पड़ोसी राज्यों के बड़े नेताओं और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के पदाधिकारियों को भी प्रचार के लिए बुलाने की तैयारी है। राष्ट्रीय स्तर के करीब 20 स्टार प्रचारकों की मंजूरी का इंतजार है। हुड्डा का झुंझुनूं, चूरू-सीकर तक प्रभाव
राजस्थान के हरियाणा से सटे जिलों में कांग्रेस हुड्डा परिवार की सभाएं करवा सकती है। हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा, दीपेंद्र हुड्डा, उदयभान और सांसद रणदीप सुरजेवाला भी प्रचारक कर सकते हैं। गहलोत, पायलट, जूली समेत 20 के नाम भी
प्रदेश कांग्रेस ने 20 प्रचारक और चुनाव कैंपेन कमेटी गठित की है। इसमें गोविंद सिंह डोटासरा, टीकाराम जूली, अशोक गहलोत, सचिन पायलट, हरीश चौधरी, सीपी जोशी, जितेंद्र सिंह, नीरज डांगी, रामकेश मीणा, रफीक खान, उदयलाल आंजना, प्रमोद भाया, शाले मोहम्मद, प्रताप खाचरियावास, शकुंतला रावत, ममता भूपेश, गणेश घोघरा, हरसहाय यादव, एमडी चौपदार और सीबी यादव हैं। 322 पूर्व सरपंच, उपसरपंच पर 5 साल बैन, पूर्व मंत्री जाहिदा के बेटा-बेटी भी
राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश में 322 पूर्व सरपंच, उपसरपंच, पंच और प्रधान इस बार चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। पंचायतीराज विभाग ने एक लिस्ट तैयार करके राज्य निर्वाचन आयोग को भेजी है। विभाग ने आयोग से जनप्रतिनिधियों को 5 वर्ष के लिए चुनाव लड़ने से बैन करने सिफारिश की थी। इसके बाद आयोग अब बैन लगाने जा रहा है। दरअसल, राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायती राज विभाग को सितंबर, 2026 को चिट्ठी लिखी थी। चिट्ठी में जनप्रतिनिधियों से जुड़ा ब्योरा मांगा था।इसमें ऐसे जनप्रतिनिधि शामिल थे जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान सरकारी फंड में वित्तीय अनियमितता की हो। पंचायती राज के नियमों के तहत भ्रष्टाचार, गबन और पद के दुरुपयोग के मामले में सजा हुई हो। अपने कार्यकाल का पूरा रिकॉर्ड, वित्तीय ऑडिट या बकाया राशि जमा नहीं कराया हो इत्यादि। लिस्ट में पूर्ववर्ती गहलोत सरकार में मंत्री रहीं जाहिदा खान के बेटे और बेटी का नाम भी शामिल है। इन पर अनियमितता के आरोप लगे थे। इन प्रधानों के चुनाव लड़ने पर रोक...
भागीरथ, श्रीमाधोपुर, शहनाज खान कामां डींग और साजिद खान पहाड़ी डींग शामिल है जिन्हें अयोग्य ठहराया गया है।