दीक्षांत समारोह का खर्च कम करने के लिए लोकभवन प्रदेश के 32 सरकारी विश्वविद्यालयों के लिए गाइडलाइन जारी करेगा। इसमें समारोह में खाने-पीने से लेकर टेंट, सजावट, डिग्री छपवाने, मेडल बनवाने में आने वाली अलग-अलग कॉस्ट को लेकर सुझाव दिए जाएंगे। यह निर्णय गुरुवार को लोकभवन में हुई बैठक में लिया गया। यह बैठक समारोह के नाम पर हो रहे अलग-अलग खर्च पर लगाम लगाने को लेकर हुई थी। बता दें कि भास्कर ने 29 सितंबर को ‘22 विवि ने 3 साल में दीक्षांत पर खर्च किए ~17.45 करोड़, जोधपुर कृषि विवि में सिर्फ 16.52 लाख में किए 3 दीक्षांत, महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय ने सबसे ज्यादा 2.27 करोड़ रुपए खर्च किए’ खबर प्रकाशित की थी। इसमें बताया था कि 3 साल में 32 लाख छात्रों के लिए डिग्रियां छपवाई गईं, लेकिन बड़े-बड़े आयोजनों में 10% छात्र भी मौजूद नहीं रहे। बैठक के मिनट्स राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े के अप्रूवल के बाद विश्वविद्यालयों को भेजे जाएंगे। खर्च कम करने के लिए बैठक में सुझाव: लोकभवन ने राज्यपाल के उच्च शिक्षा सलाहकार प्रो. कैलाश सोढ़ानी के अलावा वेटरनरी विश्वविद्यालय जोबनेर के कुलगुरु, एसकेएन कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु, राजस्थान विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार, लोकभवन के वित्तीय सलाहकार और आरयूएचएस के वित्त नियंत्रक को शामिल करते हुए बैठक की है। इसमें खर्च कम करने के सुझाव दिए गए। विश्वविद्यालय टेंट, डोम के बजाय किसी सभागार में समारोह कराने की कोशिश करें। समारोह में बड़े लंच की बजाय हाई-टी रखने पर जोर दिया जाए। सभी विश्वविद्यालयों में डिग्री छपवाने की प्रक्रिया टेंडर आधारित हो, जिससे कॉस्ट कम आए। कई जगह देखा जा रहा है कि कॉन्फिडेंशियल के नाम पर पसंदीदा फर्म को डिग्री छपवाने का काम दिया जाता है।