जयपुर जिला परिषद में 2021 का चुनाव बताता है कि सदस्य चुनाव में बहुमत हासिल करना जिला प्रमुख की कुर्सी की गारंटी नहीं है। तब 51 वार्डों में कांग्रेस ने 27 और भाजपा ने 24 सीटें जीती थीं। यानी कांग्रेस के पास बहुमत था और भाजपा उससे तीन सदस्य पीछे थी। लेकिन जिला प्रमुख के चुनाव में यही 27-24 का गणित पलटकर भाजपा के पक्ष में 26-25 हो गया और रमा देवी जिला प्रमुख बनीं। इस उलटफेर की शुरुआत जिला प्रमुख के चुनाव वाले दिन हुई। वार्ड 17 से कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर जिला परिषद सदस्य चुनी गईं रमा देवी भाजपा में शामिल हो गईं। भाजपा ने उन्हें जिला प्रमुख का प्रत्याशी बनाया। इससे भाजपा के अपने 24 सदस्यों के साथ रमा देवी को मिलाकर संख्या 25 हो गई। इसके बाद कांग्रेस के एक अन्य सदस्य का वोट भी भाजपा प्रत्याशी को मिला। मतदान में रमा देवी को 26 वोट मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी सरोज देवी शर्मा को 25 वोट मिले। इस तरह तीन सदस्य पीछे रहने वाली भाजपा ने जिला प्रमुख का चुनाव एक वोट से जीत लिया। वहीं उप जिला प्रमुख के चुनाव में कांग्रेस के मोहन डागर निर्वाचित हुए। इसमें भी क्रॉस वोटिंग हुई थी, इसके चलते सीट कांग्रेस के पाले में चली गई थी इस बार 57 सदस्य, इसलिए बहुमत के साथ एकजुटता भी अहम होगी 2021 में जयपुर जिला परिषद 51 सदस्यों की थी। इस बार 57 वार्ड हैं। पिछला चुनाव इसलिए महत्वपूर्ण उदाहरण है कि सदस्य चुनाव और जिला प्रमुख का चुनाव अलग-अलग चरण हैं। 2021 में सदस्य चुनाव के बाद सिर्फ दो सदस्यों के रुख से पूरा समीकरण बदल गया था- एक कांग्रेस छोड़कर भाजपा प्रत्याशी बनीं और एक अन्य कांग्रेस सदस्य ने भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया। आरक्षण ने ऐसे बदला दावेदारी का गणित