धौलपुर के बाड़ी में एसीजेएम कोर्ट गुरुवार देर रात 10 बजे तक खुला रहा। मामला बाइक चोरी के केस में एक आरोपी और एक नाबालिग को तीन दिन तक हिरासत में रखने का था। गुरुवार दोपहर 3 बजे पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश किया। आरोपी ने कोर्ट को बताया कि पुलिस ने उसे तीन दिन से थाने में बंद कर रखा था। उसने चोरी का मामला कबूल कर लिया था। चोरी की बाइक भी बरामद हो चुकी थी, फिर भी उसे समय पर कोर्ट में पेश नहीं किया गया। उसके साथ मारपीट की गई। उसके पिता को भी एक दिन अवैध रूप से पुलिस हिरासत में रखा गया। उसके बाद कोर्ट ने नाराजगी जताई और पुलिस को फटकार लगाई। एसीजेएम (कोर्ट संख्या-1) डॉ. सिद्धार्थ शंकर शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए आरोपी को तीन दिन तक थाने में बैठाकर रखने, उससे मारपीट करने पर गिरफ्तारी को अवैध मानते हुए तुरंत रिहा कर दिया। नाबालिग को भी उनके परिजनों के हवाले कर दिया गया है। कोर्ट ने कहा- मामले के जांच अधिकारी और थाना अधिकारी के खिलाफ झूठे सबूत रचने, कानूनी प्रक्रियाओं का दुरुपयोग करने, गलत दस्तावेज लगाने पर प्रथम दृष्टया अपराध प्रतीत होने पर मुकदमा दर्ज किया जाए। जांच अधिकारी नहीं दे पाया संतोषजनक जवाब एसीजेएम ने बाइक चोरी मामले के जांच अधिकारी ASI सुरेश चंद्र से पूछताछ की, लेकिन वे संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। दोपहर तीन बजे शुरू हुई इस मामले की बहस रात 10 बजे तक चलती रही। रात 10 बजे एसएचओ महेंद्र शर्मा ने कोर्ट में आकर अपनी बात रखी। आरोपी की गिरफ्तारी से पहले पिता को उठाकर लाई पुलिस वकील श्रीराम मंगल ने बताया- कोतवाली थाना पुलिस ने बाइक चोरी के मामले में 19 साल के युवक को गिरफ्तार किया था। उसकी गिरफ्तारी से पहले पुलिस उसके पिता को घर से उठाकर लाई थी। उन्हें पूरी रात थाने में रखा गया। जब युवक ने थाने में जाकर आत्मसमर्पण कर दिया, तब पिता को छोड़ा गया। युवक से पूछताछ हुई तो उसने बाइक चोरी की घटना कबूल कर ली। चोरी की बाइक भी पुलिस ने बरामद कर ली। लेकिन पुलिस ने आरोपी युवक को 3 दिन तक थाने में बिठाए रखा। उसके साथ एक नाबालिग को भी चोरी के मामले में थाने में बैठाया गया था। कोर्ट ने कहा- पुलिस ने अमानवीय यातनाएं दी, जो गलत है वकील ने बताया- मामले की जानकारी जब एसीजेएम डॉक्टर सिद्धार्थ शंकर शर्मा के सामने आई तो उन्होंने पूरे मामले में पूछताछ की। नाबालिग के परिवार के साथ युवक के परिजनों से भी प्रार्थना पत्र और शपथ पत्र लिए। कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने आरोपी को अमानवीय यातनाएं दी, जो कानूनन गलत है। मामले के जांच अधिकारी सुरेश चंद्र के साथ थाना अधिकारी महेंद्र शर्मा द्वारा हाईकोर्ट के आदेश और संवैधानिक प्रावधानों की अवहेलना करने पर धौलपुर एसपी, आईजी एडीजी क्राइम, एडीजी विजिलेंस और रेंज आईजी भरतपुर को निर्देश दिए कि मामले में विशेष जांच अधिकारी नियुक्त करें। मामले की जांच कराई जाए। जांच को एसीजेएम कोर्ट में पेश किया जाए।