दो करोड़ रिश्वत के मामले में गिरफ्तार एसओजी के एएसपी मुकेश सोनी ने एसीबी की पूछताछ में रिश्वत मांगने से ही इनकार कर दिया। कहा- मैंने कोई रिश्वत नहीं मांगी। इस पर एसीबी ने रिकॉर्ड की गई उसकी ही आवाज सुना दी। इसके बाद एएसपी चुप हो गया। दलाल सज्जन सिंह जैन ने भी कहा कि उसने एएसपी के कहने के बाद ही परिवादी से संपर्क किया था। एसीबी रिकॉर्डिंग, दलाल के बयान और दोनों में हुए संपर्क की कड़ियां जोड़कर पूरे प्रकरण की जांच कर रही है। एसीबी की जांच अब उस लग्जरी कार तक भी पहुंच गई है, जिसमें बैठकर रिश्वत की डील होने की बात सामने आई थी। एसीबी कार जब्त कर चुकी है। कार चित्तौड़गढ़ निवासी सईद खान की है। एसीबी ने सईद को पूछताछ और बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया है। प्रारंभिक पूछताछ में सईद ने बताया कि परिचित होने के कारण एएसपी मुकेश सोनी उसकी कार किसी काम की बात कहकर ले गया था। एएसपी बोला: घूस नहीं मांगी, एसीबी ने रिकॉर्डिंग सुनाई तो चुप एएसपी मुकेश सोनी को एसीबी और विजिलेंस की कार्रवाई के तौर-तरीकों की जानकारी थी। वह एसीबी चौकी के लगभग सभी अधिकारियों और जवानों को पहचानता था। इसी बीच परिवादी ने एसीबी अधिकारियों को वॉट्सएप कॉल पर बताया कि मुकेश उस पर निगरानी रख रहा है। इसके बाद एसीबी ने अपनी रणनीति बदल दी। परिवादी को एसीबी कार्यालय आने से रोक दिया गया और कहा गया कि अधिकारी खुद उसके पास पहुंचेंगे। लेकिन उसके पास किसी परिचित एसीबी अधिकारी या जवान को भेजने के बजाय एक प्रशासनिक अधिकारी को सत्यापन के लिए भेजा गया। मकसद था कि मुकेश परिवादी पर नजर रखे या तकनीकी आधार पर उसकी गतिविधियां जांचे भी तो उसे एसीबी की कार्रवाई का शक नहीं हो। इसी रणनीति के साथ सत्यापन आगे बढ़ाया। 3 दिन रिमांड पर लिया रिमांड अवधि पूरी होने पर बुधवार को एसीबी ने दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया। एसीबी ने कोर्ट को बताया कि एएसपी मुकेश सोनी पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहा है और मामले में अभी कई तथ्यों की जांच बाकी है। इस आधार पर कोर्ट ने दोनों आरोपियों का तीन दिन का रिमांड और दे दिया।