डूंगरपुर नगर परिषद सभापति पद के चुनाव में शुक्रवार को बड़ा बदलाव हुआ। भाजपा से पार्टी सिंबल नहीं मिलने के बाद निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल करने वाले पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष प्रभु पंड्या ने अपना पर्चा वापस ले लिया। उनके नामांकन वापस लेने के बाद भाजपा की अधिकृत प्रत्याशी सुशीला गुप्ता का सभापति बनना तय माना जा रहा है। सुशीला गुप्ता के सामने अब कांग्रेस के भरत नागदा चुनाव मैदान में हैं। पार्टी सिंबल नहीं मिलने पर निर्दलीय उतरे थे पंड्या सभापति पद के लिए भाजपा की ओर से पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष प्रभु पंड्या और स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर केके गुप्ता की पत्नी सुशीला गुप्ता ने नामांकन दाखिल किया था। पार्टी ने सुशीला गुप्ता को अधिकृत प्रत्याशी बनाते हुए सिंबल दिया था। इसके बाद प्रभु पंड्या ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल कर चुनावी मुकाबले को रोचक बना दिया था। नाम वापसी के साथ मुकाबला अब सीधा शुक्रवार को नामांकन वापसी के आखिरी दिन प्रभु पंड्या ने अपना पर्चा वापस ले लिया। इसके साथ ही सभापति पद का मुकाबला अब भाजपा की सुशीला गुप्ता और कांग्रेस के भरत नागदा के बीच रह गया है। पंड्या के मैदान से हटने के बाद भाजपा खेमे में भी स्थिति साफ हो गई है। भाजपा के पास 25 पार्षद, कांग्रेस के 12 नगर परिषद में भाजपा के पास 25 पार्षद हैं, जो बहुमत के आंकड़े के लिए पर्याप्त हैं। वहीं, कांग्रेस के पास 12 पार्षद हैं। बीएपी के 3 पार्षदों को जोड़ने पर कांग्रेस के समर्थन में अधिकतम 15 पार्षदों का आंकड़ा बनता है। ऐसे में मौजूदा संख्या बल के हिसाब से भाजपा प्रत्याशी सुशीला गुप्ता का सभापति चुना जाना तय माना जा रहा है।