राष्ट्रीय शिक्षा नीति (2020) व नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क-2022 के तहत उदयपुर और सलूंबर जिले के 30 पीएमश्री स्कूलों की बाल वाटिकाओं में पढ़ाई का तौर-तरीका बदलने जा रहा है। पूर्व प्राथमिक कक्षाओं में अब छोटे बच्चे खेलोगे-कूदोगे बनोगे नवाब की तर्ज पर सुरक्षित खिलौनों और टीएलएम (टीचिंग लर्निंग मटेरियल) किट से पढ़ेंगे। समग्र शिक्षा विभाग ने इसके लिए 11.25 लाख रुपए का बजट मंजूर किया है। छात्रों के हिसाब से प्रति बाल वाटिका को अधिकतम 37 हजार 500 रुपए दिए जाएंगे। अगले दो दिनों में स्कूलों को वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी जाएगी। एपीसी राजेंद्र प्रसाद नायक ने बताया कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए शिक्षा मंत्रालय के प्रबंध पोर्टल पर ऑनलाइन प्रविष्टि अनिवार्य की गई है। पीटीएम में बच्चे इन सामग्रियों से गतिविधियां करके अभिभावकों के सामने प्रदर्शन करेंगे। बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने कड़े मानक तय किए हैं। सभी खिलौनों और शिक्षण सामग्री पर भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) का मार्क अनिवार्य होगा। विक्रेता का वैध बीआईएस लाइसेंस नंबर एसएमसी/एसडीएमसी समिति के रिकॉर्ड में रहेगा। जमीन पर चुनौतियां भी..., खरीदारी में ये 4 बड़ी बाधाएं बीआईएस विक्रेताओं की कमी : कोटड़ा और झाड़ोल जैसे दूरस्थ इलाकों में बीआईएस लाइसेंस धारक दुकानें सीमित हैं। ट्रेनिंग की कमी : शिक्षकों को बाल वाटिका पैडागॉजी का व्यावहारिक प्रशिक्षण न मिलने पर खिलौने अलमारी में बंद रहने की आशंका है। रखरखाव का बजट नहीं : खिलौने टूटने या गुम होने पर मेंटेनेंस का अलग से प्रावधान नहीं है। समय का दबाव : 5 दिन की कम समय-सीमा के कारण संस्था प्रधानों पर जल्दबाजी में खरीदारी का प्रशासनिक दबाव रहेगा।