दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों को उन्नत एवं रोग-सहनशील किस्मों की तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र, सवाईमाधोपुर की ओर से खरीफ 2026 में दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन के तहत उड़द की उन्नत किस्म ‘कोटा उड़द-4’ का प्रथम पंक्ति प्रदर्शन कराया जा रहा है। जिले में कुल 40 हेक्टेयर क्षेत्र में लगाए गए इन प्रदर्शनों के माध्यम से किसानों को उन्नत किस्म की उत्पादन क्षमता और रोग-प्रतिरोधक क्षमता से रूबरू कराया जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से ये प्रदर्शन खिजुरी, कुस्तला, नीमली कलां एवं सेवाती खुर्द गांवों में किसानों के खेतों पर लगाए गए हैं। प्रदर्शन वाले खेतों में फसल की स्थिति का वैज्ञानिकों द्वारा नियमित रूप से अवलोकन किया जा रहा है। किसानों को फसल प्रबंधन से जुड़ी आवश्यक तकनीकी जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जा रही है। निरीक्षण के दौरान प्रदर्शन वाले खेतों में कोटा उड़द-4 की फसल की स्थिति उत्साहजनक पाई गई। वैज्ञानिकों के अनुसार फसल में पीत शिरा रोग का प्रकोप नगण्य रहा। पौधों में फलियों की संख्या भी सामान्य रूप से प्रचलित उड़द की किस्मों की तुलना में अधिक और बेहतर दिखाई दी। कृषि विज्ञान केंद्र के अनुसार फसल में रोग का प्रकोप कम रहने पर उत्पादन क्षमता बढ़ने की संभावना रहती है। पौधों में अच्छी फलियां विकसित होने पर भी उत्पादन बढ़ सकता है। ऐसे में जिले के उड़द उत्पादक किसानों के लिए यह किस्म उपयोगी विकल्प के रूप में सामने आ सकती है। दलहन उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से लगाए गए प्रथम पंक्ति प्रदर्शनों का उद्देश्य किसानों को खेत पर ही उन्नत तकनीक का प्रत्यक्ष प्रदर्शन कराना है। इससे किसान नई किस्म के पौधों की वृद्धि, रोग की स्थिति, फलियों के विकास और संभावित उत्पादन को स्वयं देखकर उसके बारे में निर्णय ले सकेंगे। दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन के तहत किए जा रहे इन प्रयासों से जिले में उड़द की उत्पादकता बढ़ाने, किसानों की आय में सुधार करने, दलहन के क्षेत्रफल एवं उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है। वैज्ञानिकों का मानना है कि जिले के किसानों को उन्नत और रोग-सहनशील किस्मों की जानकारी उपलब्ध कराने से दलहन उत्पादन को नई गति मिल सकती है।