रविवार 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र प्रारंभ हो जाएंगे। झील का वाडा सहित खिरनी घाट राज राजेश्वरी, बीनारायण गेट स्थित काली माता, पाई बाग मंशा देवी, कोतवाली स्थित वैष्णो देवी, रणजीत नगर स्थित देवी माता सहित कई मंदिरों में रविवार को घट स्थापना, हवन सहित कई अनुष्ठान होंगे। घरों में भी देवी मां की पूजा प्रारंभ होगी। इसके लिए लोगों ने घट, पूजा सामग्री, चुन्नी सहित अन्य सामग्री खरीदी। कई स्थानों पर देवी मां की बंगाली परंपरा अनुसार देवी मां का पांडाल सजाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य रामभरोसी भारद्वाज बताया कि प्रतिपदा पर वैधृति योग की मौजूदगी के कारण घटस्थापना और कलश पूजन अभिजीत मुहूर्त या शुभ/अमृत के चौघड़िए में ही शास्त्रीय विधि से किया जाना फलदायी होगा। लाभ/अमृत की शुभ घड़ी सुबह 9.30 से दोपहर 12.30 बजे तक श्रेष्ठ है। ज्योतिषीय गणना के लिहाज से बेहद दुर्लभ संयोग लेकर आ रहे हैं। 11 से 20 अक्टूबर तक चलने वाले इस शक्ति पर्व के दौरान भौतिक सुख-सुविधाओं और धन-वैभव का कारक शुक्र ग्रह अपनी ही राशि तुला में वक्री अवस्था में गोचर करेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शुभ ग्रह जब अपनी ही राशि में वक्री (उल्टी चाल) होता है, तो उसकी शुभ फल देने की चेष्टा कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में 11 से 18 अक्टूबर तक का समय साधना, नई व्यावसायिक योजनाओं, खरीदारी और संपत्ति सृजन के लिए अप्रत्याशित समृद्धि देने वाला रहेगा।