प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी इन दिनों दोहरी मार झेल रही है। एक तरफ 89 आईएएस, आईपीएस, आईएफएस और आरएएस अफसरों पर अपने विभाग के साथ 2 या इससे अधिक विभागों की जिम्मेदारी है। कुछ अफसर 6 से 8 विभागों का काम संभाल रहे हैं। दूसरी तरफ 24 बड़े अफसरों के पास हाजिरी लगाने के अलावा कोई काम नहीं है। अतिरिक्त प्रभार के चलते अफसरों पर फाइलों का दबाव कई गुना बढ़ गया है। एक अफसर रोज 100 फाइलें पास करता है तो इन दिनों अतिरिक्त जिम्मेदारियों के चलते संबंधित अफसरों के पास रोज 300 से 500 फाइलें आने का अनुमान है। इसके अलावा बैठकों, मंत्रियों और सरकार के आदेशों की पालना का काम भी है। ऐसे में अपने विभाग के साथ अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे अफसरों के लिए सभी जिम्मेदारियां निभाना चुनौती बन गया है। इसका सबसे ज्यादा असर फील्ड दौरों और निरीक्षण पर पड़ रहा है। अतिरिक्त प्रभार वाले जिलों, विभागों और निदेशालयों का नियमित दौरा नहीं हो पा रहा। इससे सरकारी योजनाओं की निगरानी और सेवाओं की समय पर डिलीवरी प्रभावित होने की आशंका है। वहीं, 24 अफसरों को काम नहीं मिलने से प्रशासनिक संसाधनों के इस्तेमाल पर भी सवाल उठ रहे हैं। यह काम नहीं हुआ 30 दिन से अधिक एपीओ वाले मामलों की जानकारी हर महीने मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जानी आवश्यक है। इसके बाद भी इसे नहीं भेजा जा रहा। 6 महिला सहित 24 अफसर एपीओ, ये सिर्फ अपनी हाजिरी देते हैं आईएएस अंबरीश कुमार 24 अगस्त से, शिवेन्द्र प्रताप 22 सितंबर से, आईपीएस माधव उपाध्याय 6 माह से, आईएफएस हेमंत सिंह डेपुटेशन से लौटने पर, आरएएस आशु चौधरी 18 अगस्त से, पिंकी मीणा 17 अगस्त से, रंजीता गौतम 19 अगस्त से, प्रियंका बड़गुर्जर 5 अक्टूबर, मोनिका सामोर 12 अगस्त से, सुधा रानी मीना 20 अगस्त से, अजय कुमार आर्य 5 अक्टूबर से, परसाराम 5 अक्टूबर से, हनुमान सिंह राठौड़ 3 अक्टूबर से, लक्ष्मीकांत कटारा 5 अक्टूबर, भंवरलाल जनागल 5 अक्टूबर, मांगीलाल 5 अक्टूबर से, सुनील कुमार झिंगोनिया 5 अक्टूबर से, अरुण जैन 5 अक्टूबर और हेमंत कुमार 7 अक्टूबर से एपीओ चल रहे हैं। इनके अलावा 4 सचिवालय सेवा के अफसर एपीओ हैं। क्या है एपीओ रूल्स प्रदेश में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को 30 दिन से ज्यादा एपीओ नहीं रखा जा सकता। किसी कारणवश 30 दिन से अधिक एपीओ रखना जरूरी हो, तो उसके लिए वित्त विभाग की पूर्व स्वीकृति और ठोस कारण बताना अनिवार्य होगा। एपीओ को किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई, साइडलाइन करने या दबाव बनाने के हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।