राजस्थान हाईकोर्ट ने हनुमानगढ़ नगर परिषद के अध्यक्ष चुनाव से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई की है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को राहत देते हुए राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए हैं। इसमें कहा गया है कि याचिकाकर्ता के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया के बिना कोई कार्रवाई न की जाए। जस्टिस कुलदीप माथुर की एकलपीठ ने यह आदेश दिया। यह रिट याचिका हनुमानगढ़ के वार्ड नंबर 12 की निवासी मंजू ने दायर की थी। मामले में गृह विभाग, पुलिस महानिदेशक, जिला कलेक्टर और उपखंड अधिकारी को जिम्मेदार बनाया गया था। याचिकाकर्ता के वकील रवि भंसाली और कुणाल उपाध्याय ने कोर्ट में बताया कि राजनीतिक दुश्मनी के कारण प्रशासन याचिकाकर्ता को परेशान कर सकता है। उन्हें यह भी आशंका थी कि अध्यक्ष पद के चुनाव में उन्हें और दूसरे सदस्यों को वोट डालने से रोका जा सकता है। वोट डालने की आशंका से रोकने का ठोस आधार नहीं मामले की सुनवाई के दौरान जज ने कहा कि याचिकाकर्ता को वोट डालने से रोकने की आशंका का कोई ठोस आधार नहीं दिखता। हालांकि, उत्पीड़न की आशंका को देखते हुए कोर्ट ने साफ किया। कोर्ट ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया के बिना कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी। अदालत ने याचिका मंजूर करते हुए सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए हैं। राज्य सरकार और पुलिस विभाग की तरफ से अतिरिक्त महाधिवक्ता बी.एल. भाटी ने नोटिस लिए। जिला निर्वाचन अधिकारी की तरफ से वकील रवींद्र जाला ने भी नोटिस स्वीकार किए। हाईकोर्ट ने सरकार को एक हफ्ते में जवाब देने का समय दिया है।