हनुमानगढ़ में भारतीय डाक विभाग के ‘राखी से रक्षा’ अभियान के तहत टाउन स्कूल के छात्र-छात्राओं ने देश की सीमाओं पर तैनात जवानों के लिए अपने हाथों से राखियां तैयार कर डाक विभाग को सौंपीं। स्कूल के छोटे बच्चों ने अपने हाथों से रंग-बिरंगे धागों, मोतियों और सजावटी सामग्री से सुंदर राखियां बनाईं। इसके साथ ही उन्होंने जवानों के नाम संदेश लिखकर देश की रक्षा के लिए उनके प्रति आभार जताया और रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। ‘हम राखी नहीं बांध सकते, लेकिन अपना स्नेह भेज सकते हैं’ कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। उन्होंने कहा कि भले ही वे स्वयं जवानों की कलाई पर राखी नहीं बांध सकतीं, लेकिन उनकी बनाई राखी जब किसी सैनिक की कलाई पर सजेगी तो उन्हें अपनेपन का अहसास होगा। छात्र-छात्राओं ने इन राखियों के जरिए सैनिकों तक भाई-बहन के प्रेम और अपनत्व का संदेश पहुंचाने की भावना व्यक्त की। त्योहार पर परिवार से दूर जवानों तक पहुंचेगा स्नेह जंक्शन स्थित मुख्य डाकघर के अधिकारी पुरषोत्तम कुक्कड़ ने अभियान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ‘राखी से रक्षा’ का उद्देश्य जवानों को यह महसूस कराना है कि देशवासी उनके साथ खड़े हैं। सैनिक त्योहारों पर अपने परिवारों से दूर रहकर देश की सुरक्षा में तैनात रहते हैं। ऐसे में उनके लिए भेजी गई राखियां केवल धागा नहीं, बल्कि सम्मान, स्नेह और विश्वास का प्रतीक हैं। डॉ. निशांत बतरा की पत्नी ने भेजीं 100 राखियां अधिकारी पुरषोत्तम कुक्कड़ ने बताया कि डॉ. निशांत बतरा की पत्नी ने भी जवानों के लिए 100 राखियां भेजी हैं। इन राखियों को अभियान के तहत सीमाओं पर तैनात सैनिकों तक पहुंचाया जाएगा। छात्र-छात्राओं में बढ़ी देशभक्ति की भावना ‘राखी से रक्षा’ अभियान के इस कार्यक्रम ने छात्र-छात्राओं में देशभक्ति और जवानों के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत किया। कार्यक्रम ने यह संदेश भी दिया कि सरहद पर देश की रक्षा कर रहे जवान और देश के आम नागरिक भावनाओं के ऐसे अटूट रिश्ते से जुड़े हैं, जिसे रक्षाबंधन जैसे पर्व और मजबूत करते हैं।