राजस्थान के लोगों, परंपराओं, हुनर, खान-पान और रोजमर्रा की जिंदगी को समझने के लिए यात्रा निकाली गई। इस दौरान यात्रा में टीम ने राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों में 3,500 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की। 4 सितंबर को जयपुर से शुरू हुई 20 दिन की इस यात्रा में 45 से ज्यादा पड़ावों तक पहुंचकर स्थानीय जीवन और अनकही कहानियों को दस्तावेजित किया। कार्टिस्ट की ओर से शुरू की गई ‘स्टोरीज ऑफ इंडियन सिटीज’ पहल के राजस्थान चैप्टर का मंगलवार को जयपुर स्थित अल्बर्ट हॉल के बाहर समापन हुआ। इस यात्रा का उद्देश्य राजस्थान की कला, संस्कृति, विरासत, खान-पान और स्थानीय समुदायों से जुड़ी उन कहानियों को सामने लाना था, जो आमतौर पर पर्यटन के पारंपरिक दायरे में जगह नहीं बना पातीं। यात्रा के दौरान टीम ने प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों के साथ छोटे कस्बों, गांवों और दूरदराज के इलाकों का भी रुख किया। इवेंट और यात्रा के फोटोज देखिए जयपुर से शुरू हुई यात्रा, प्रदेश के कई हिस्सों तक पहुंची राजस्थान चैप्टर की शुरुआत 4 सितंबर को जयपुर से हुई थी। इसके बाद यात्रा मंडावा, बीकानेर, जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, जवाई, रणकपुर, नाथद्वारा, उदयपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, बूंदी, कोटा, भरतपुर, डीग और अलवर सहित प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से होकर गुजरी। यात्रा का फोकस केवल ऐतिहासिक इमारतों या लोकप्रिय पर्यटन स्थलों को दिखाना नहीं था। टीम ने स्थानीय लोगों और समुदायों के बीच जाकर उनके जीवन, पारंपरिक व्यवसाय, लोककलाओं, हस्तशिल्प और पीढ़ियों से चले आ रहे हुनर को समझने का प्रयास किया। कई स्थानों पर स्थानीय लोगों के साथ बातचीत कर उनके अनुभव और जीवन से जुड़ी कहानियों को रिकॉर्ड किया गया। आदिवासी क्षेत्र से लेकर दूरदराज के कारीगरों तक की कहानियां कार्टिस्ट के संस्थापक हिमांशु जांगिड़ ने समापन के दौरान यात्रा के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि 20 दिनों में राजस्थान को कई अलग-अलग रूपों में देखने और यहां के लोगों से मिलने का अवसर मिला। उनके अनुसार, यात्रा के दौरान कुछ ऐसी कहानियां भी सामने आईं, जिन्हें केवल दस्तावेजित करने से आगे जाकर महसूस किया गया। बांसवाड़ा के आदिवासी क्षेत्र में खेमराज जी और उनके परिवार से हुई मुलाकात को उन्होंने यात्रा के खास अनुभवों में शामिल किया। इसी तरह बाड़मेर के दूरदराज क्षेत्र में पारंपरिक पैचवर्क और स्थानीय कढ़ाई से जुड़े कानाराम जी की कहानी भी टीम के लिए महत्वपूर्ण रही। इन मुलाकातों के जरिए राजस्थान के ग्रामीण और आदिवासी जीवन के उन पहलुओं को समझने का मौका मिला, जो आम पर्यटन कथाओं में अक्सर नजर नहीं आते। हर इलाके के स्वाद को भी किया डॉक्यूमेंट यात्रा के दौरान राजस्थान के खान-पान और स्थानीय स्वाद को भी विशेष रूप से दर्ज किया गया। अलग-अलग क्षेत्रों में मिलने वाले पारंपरिक व्यंजनों, स्थानीय पकाने के तरीकों और भोजन से जुड़ी सांस्कृतिक परंपराओं को टीम ने अपने दस्तावेजीकरण का हिस्सा बनाया। राजस्थान की शाही विरासत को समझने के लिए विभिन्न राजघरानों के सदस्यों से भी मुलाकात और संवाद किया गया। इस दौरान प्रदेश की रियासती परंपराओं, विरासत और बदलते समय के साथ इनके स्वरूप में आए बदलावों को समझने का प्रयास किया गया। सिर्फ 3500 किलोमीटर का सफर नहीं, लोगों तक पहुंचने की यात्रा हिमांशु जांगिड़ ने कहा कि यह यात्रा केवल 3,500 किलोमीटर की दूरी तय करने का अभियान नहीं थी, बल्कि लोगों तक पहुंचने और राजस्थान को करीब से समझने की कोशिश थी। उनके अनुसार, यात्रा के दौरान जुटाई गई कहानियों को आगे फोटोग्राफी, वीडियो और डिजिटल स्टोरीटेलिंग के माध्यम से दर्शकों तक पहुंचाया जाएगा। यात्रा के दौरान टीम ने जिन लोगों से मुलाकात की, उनके काम, जीवन और अनुभवों को तस्वीरों और वीडियो के जरिए रिकॉर्ड किया गया है। इन कहानियों के जरिए राजस्थान की विविधता को एक अलग नजरिए से प्रस्तुत करने की योजना है। शहरों और लोगों की कहानियां ‘स्टोरीज ऑफ इंडियन सिटीज’ कार्टिस्ट की नई पहल है, जिसका उद्देश्य भारत के अलग-अलग शहरों और क्षेत्रों की स्थानीय पहचान, कला, संस्कृति, विरासत और लोगों की कहानियों को दस्तावेजित करना है। राजस्थान इसका एक महत्वपूर्ण अध्याय रहा, जिसमें टीम ने प्रदेश की विविध भौगोलिक और सांस्कृतिक पहचान को करीब से समझने का प्रयास किया।