प्रदेश में अवैध खनन को रोकना अफसरों के लिए जानलेवा साबित होने लगा है। पिछले दिनों ही सवाई माधोपुर जिले में बजरी माफियाओं ने पुलिसकर्मी पर ट्रैक्टर चढ़ा दिया। इससे पहले प्रतापगढ़ में वन विभाग के रेंजर को जान गंवानी पड़ी। प्रदेश में अवैध बजरी और खनन का नेटवर्क सिर्फ पर्यावरण और सरकारी राजस्व को ही नुकसान नहीं पहुंचा रहा बल्कि इसे रोकने वाले वनकर्मियों, पुलिस और खनन विभाग के कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल लगा है। प्रदेश में 7 साल में अवैध खनन, परिवहन और खनिजों के अवैध भंडारण से जुड़े 71 हजार 322 मामले दर्ज हुए। इनमें 7 हजार 173 एफआईआर दर्ज हुई। अकेले अरावली क्षेत्र के 20 जिलों में 40 हजार 175 मामले और 4 हजार 181 प्राथमिकी दर्ज हुईं। 2024 में खनन गतिविधियों से जुड़े मामलों में कार्रवाई करने वाले 311 अधिकारी-कर्मचारियों पर 93 हमलों की जानकारी सरकार ने विधानसभा में दी थी। इसी साल अभी तक दो वनकर्मियों की मौत ने इस खतरे को फिर सामने ला दिया है। जनवरी में धौलपुर के वनरक्षक जितेंद्र सिंह शेखावत और सितंबर में प्रतापगढ़ के वन रेंजर प्रताप सिंह चूंडावत की हत्या इसी को लेकर हुई। पिछले महीने 23 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने रेंजर की हत्या की घटना पर संज्ञान लेते हुए सरकार से जवाब मांगा था। मामले की 6 अक्टूबर को सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने रेंजर की मौत और चंबल में अवैध खनन को लेकर कहा कि यह विनाशकारी है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान, एमपी और यूपी से दो सप्ताह में अनुपालन हलफनामा मांगा है। तीनों राज्यों को बताना होगा कि चंबल घड़ियाल अभयारण्य और अवैध खनन रोकने के लिए कोर्ट निर्देशों पर कितना अमल किया है। आधी से ज्यादा एफआईआर, राज्य के 20 अरावली जिलों में ही दिसंबर 2023 के बीच 2024 में 93 हमले, 311 अफसर-कर्मचारी निशाने पर विधानसभा में सरकार की ओर से दिए गए आंकड़ों के मुताबिक 2024 में खनन माफिया से जुड़े 93 हमलों में 311 अधिकारी और कर्मचारी प्रभावित हुए। यह आंकड़ा खान विभाग और वन विभाग की कार्रवाई से जुड़े कर्मचारियों का है। इसी साल खान एवं भू-विज्ञान विभाग ने 1 हजार 438 अवैध खनन के मामले दर्ज किए। इनमें 270 एफआईआर हुई। वन विभाग ने 867 मामले दर्ज किए और इनमें 867 एफआईआर की जानकारी दी गई। पुलिस भी सुरक्षित नहीं, 122 हमले, 5 की मौत सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे मामले 1. धौलपुर : इसी साल 8 जनवरी को सरमथुरा क्षेत्र में अवैध बजरी परिवहन रोकने की कोशिश के दौरान वनरक्षक जितेंद्र सिंह शेखावत को ट्रैक्टर-ट्रॉली ने कुचल दिया। गंभीर चोटों के बाद 9 जनवरी को उनकी मौत हो गई। मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी रखा गया। 2. प्रतापगढ़ : 21 सितंबर 2026 की रात छोटीसादड़ी क्षेत्र में अवैध खनन की सूचना पर कार्रवाई के दौरान वन रेंजर प्रताप सिंह चूंडावत डंपर की चपेट में आ गए। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस ने जेसीबी मशीन और अन्य वाहन जब्त किए कर पूछताछ शुरू की। 2026 में धौलपुर में 105, करौली में 13, कोटा में 5 और बूंदी में 1 FIR दर्ज होने की जानकारी है। चंबल क्षेत्र में अवैध रेत/बजरी खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले से निगरानी कर रहा है। कोर्ट के रिकॉर्ड में 40 संवेदनशील स्थान, 24 स्थायी कैंप और 7 अस्थायी चेक पोस्ट की जानकारी भी दर्ज है। भीलवाड़ा में 1 जनवरी 2026 से 28 अगस्त 2026 तक भीलवाड़ा पुलिस ने अवैध बजरी, फेल्सपार, सैंडस्टोन और अन्य खनिजों से जुड़े 845 मामले दर्ज किए। इनमें 622 में चार्जशीट पेश हो चुकी थी और 223 मामले लंबित थे। इस दौरान 1 हजार 154 गिरफ्तारियां हुईं और 1 हजार 109 वाहन/मशीन जब्त की गई।