जयगढ़ फोर्ट एक बार फिर संगीत और संस्कृति की अलग-अलग परंपराओं का गवाह बनने जा रहा है। सवाई पद्मनाभ सिंह की पहल और टीमवर्क आर्ट्स के सहयोग से आयोजित जयगढ़ हेरिटेज फेस्टिवल 2026 के तीसरे संस्करण के कलाकारों की सूची जारी कर दी गई है। 18 से 20 दिसंबर तक होने वाले इस फेस्टिवल में राजस्थान के लोक संगीत से लेकर अंतरराष्ट्रीय विश्व संगीत तक की प्रस्तुतियां देखने को मिलेंगी। फेस्टिवल में भारत के साथ फ्रांस, यूक्रेन और अफ्रीकी सहारा क्षेत्र की संगीत परंपराओं को भी जयगढ़ के ऐतिहासिक परिवेश में मंच मिलेगा। आयोजन में मामे खान, सोना मोहापात्रा, बाड़मेर बॉयज, मूरालाला मारवाड़ा, नाथू लाल सोलंकी, लक्ष्मण दास बाउल सहित कई भारतीय कलाकार प्रस्तुति देंगे। वहीं, अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतियों में बॉम्बिनो, तिती रॉबिन, मुराद अली खान, गुलाबो सपेरा, महुआ शंकर, यारोस्लाव डज़ुस और विक्टोरिया लेलेका शामिल हैं। सहारा के डेजर्ट ब्लूज से यूक्रेन के लोक संगीत तक फेस्टिवल की खास प्रस्तुतियों में सहारा क्षेत्र के चर्चित कलाकार बॉम्बिनो का डेजर्ट ब्लूज संगीत शामिल है। उनके ग्रैमी-नॉमिनेटेड एल्बम ‘डेरन’ के जरिए उनकी संगीत शैली को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है। फ्रांस और राजस्थान के संगीत का मेल तिती रॉबिन और मुराद अली खान की ‘खुशबू’ प्रस्तुति में देखने को मिलेगा। इसमें गुलाबो सपेरा और महुआ शंकर भी शामिल होंगी। वहीं, यूक्रेन के यारोस्लाव डज़ुस और विक्टोरिया लेलेका बंडूरा, पियानो और गायन के जरिए यूक्रेन की लोक संगीत परंपरा को प्रस्तुत करेंगे। इस प्रस्तुति में लोक, जैज और विश्व संगीत का संगम देखने को मिलेगा। 32 संगीतकारों के साथ मामे खान का फोक ऑर्केस्ट्रा फेस्टिवल की प्रमुख प्रस्तुतियों में मामे खान का ‘फोक ऑर्केस्ट्रा ऑफ राजस्थान’ खास आकर्षण रहेगा। इसमें 32 वरिष्ठ संगीतकार और मंगणियार समुदाय की 15 से अधिक पीढ़ियों की संगीत परंपरा से जुड़े कलाकार एक साथ मंच पर नजर आएंगे। मामे खान के नेतृत्व में होने वाली यह प्रस्तुति राजस्थान की लोक संगीत विरासत को बड़े ऑर्केस्ट्रा के स्वरूप में पेश करेगी। इसके अलावा सोना मोहापात्रा अपने नए शो ‘द अनटेम्ड बिलव्ड’ के साथ प्रस्तुति देंगी। इसमें सूफी और भक्ति संगीत परंपराओं के साझा आध्यात्मिक जुड़ाव को सामने लाने का प्रयास किया जाएगा। ये कलाकार भी होंगे शामिल भारतीय कलाकारों में बाड़मेर बॉयज, मूरालाला मारवाड़ा, रहमत-ए-नुसरत, ढोलक रानी, कार्तिकेय और मकरंद, लक्ष्मण दास बाउल, भुट्टे खान मंगणियार के नेतृत्व वाला धरोहर बैंड और नाथू लाल सोलंकी शामिल हैं। नाथू लाल सोलंकी पुष्कर की नगाड़ा संगीत परंपरा को मंच पर प्रस्तुत करेंगे, जबकि लक्ष्मण दास बाउल बाउल संगीत की विरासत से दर्शकों को रूबरू कराएंगे। विरासत को जीवंत अनुभव बनाने की कोशिश सवाई पद्मनाभ सिंह ने कहा- जयगढ़ जयपुर के इतिहास का जीवंत गवाह रहा है। इस बार का संगीत कार्यक्रम भी इसी भावना को आगे बढ़ाएगा। उनके अनुसार राजस्थान की आवाजों को भारत और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले कलाकारों के साथ एक मंच पर लाया जा रहा है। जयपुर के 300वें स्थापना वर्ष की ओर बढ़ते हुए जयगढ़ में संगीत, शिल्प और संवाद का यह आयोजन विरासत को नए रूप में सामने लाने का अवसर होगा। टीमवर्क आर्ट्स के मैनेजिंग डायरेक्टर संजॉय के. रॉय ने कहा- फेस्टिवल थार की मंगणियार परंपरा से लेकर डेजर्ट ब्लूज़, सूफी और भक्ति संगीत तक विभिन्न संगीत परंपराओं को एक मंच पर ला रहा है। उनके मुताबिक जयगढ़ का ऐतिहासिक परिवेश इन प्रस्तुतियों के साथ फोर्ट के इतिहास और वास्तुकला को भी नए तरीके से अनुभव करने का अवसर देगा। फेस्टिवल प्रोड्यूसर अविक रॉय ने बताया- इस बार कार्यक्रम में राजस्थान की लोक परंपराओं के साथ भारत और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के संगीत को शामिल किया गया है। वहीं को-प्रोड्यूसर सम्मोहन माथोड़िया ने कहा कि फेस्टिवल का उद्देश्य विरासत को केवल अतीत की स्मृति के रूप में नहीं, बल्कि लगातार विकसित होने वाले सांस्कृतिक अनुभव के रूप में प्रस्तुत करना है।