जयपुर के आर्च कॉलेज ऑफ डिजाइन एंड बिजनेस के 24वें दीक्षांत समारोह का आयोजन मालवीय नगर स्थित कैम्पस में किया गया। इसमें विद्यार्थियों को पढ़ाई पूरी करने के बाद करियर की नई राह चुनने के साथ अपनी पहचान बनाने और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया गया। समारोह में वक्ताओं ने विद्यार्थियों से कहा कि अपने काम का उद्देश्य स्पष्ट रखें, नए अवसरों को पहचानें और अपनी रचनात्मकता को आगे बढ़ाने के लिए उद्यमिता का रास्ता भी अपनाएं। विजय गोलेछा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में किसी भी सफर की शुरुआत यह समझने से होनी चाहिए कि हम वह काम क्यों करना चाहते हैं। उनके अनुसार, किसी काम के पीछे का उद्देश्य जितना साफ होगा, उस दिशा में आगे बढ़ना उतना ही आसान होगा और सफलता की संभावना भी बढ़ेगी। उन्होंने आर्च के आभूषण डिजाइन के विद्यार्थियों के काम की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के काम को देखकर वे काफी प्रभावित हुए। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर उन्हें भी आर्च में पढ़ने का मौका मिला होता तो वे इसे अपने लिए सौभाग्य मानते। एक कलाकार के तौर पर विद्यार्थियों के साथ अपने जुड़ाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि डिजाइन के क्षेत्र में आगे बढ़ते समय अपनी अलग पहचान बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी रचनात्मक सोच और मौलिकता को हर परिस्थिति में बनाए रखने की अपील की। इवेंट की फोटोज देखिए… नौकरी के साथ अपना काम शुरू करने का विकल्प रजत वर्मा ने डिग्री हासिल करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उनके सामने अब अपने करियर को आगे बढ़ाने के कई रास्ते हैं। उन्होंने युवाओं को नौकरी के साथ खुद का काम शुरू करने और उद्यमी बनने पर भी विचार करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से युवा डिजाइनरों और नए उद्यम शुरू करने वालों के लिए कई योजनाएं चल रही हैं। इन योजनाओं की जानकारी लेकर युवा अपनी रचनात्मक सोच को व्यवसाय में बदल सकते हैं। इससे उन्हें अपने तरीके से काम करने की आजादी मिलने के साथ नए रोजगार के अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं। तकनीक ने आसान किए काम, अवसर पहचानने की जरूरत डॉ. राहुल मिश्रा ने कहा कि आज का समय युवाओं के लिए कई मायनों में खास है। तकनीक ने ऐसे कई काम आसान कर दिए हैं, जिन्हें पहले पूरा करने में काफी समय और मेहनत लगती थी। ऐसे में विद्यार्थियों को अपनी शिक्षा और हुनर का इस्तेमाल नए काम और नए व्यवसाय खड़े करने में करना चाहिए। उन्होंने नदी का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह नदी हिमनद से निकलती है और रास्ते में आने वाली परिस्थितियों के अनुसार अपना रास्ता बनाते हुए समुद्र तक पहुंचती है, उसी तरह युवाओं को भी अपने सफर में आगे बढ़ते रहना चाहिए। पीढ़ियों के लिए भी संसाधन बचाकर रखना जरूरी डॉ. राहुल मिश्रा ने विद्यार्थियों को पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों को लेकर भी जागरूक किया। उन्होंने कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन इसके लिए प्राकृतिक संसाधनों का जरूरत के मुताबिक ही इस्तेमाल होना चाहिए। आज जितना संभव हो उतना लेना और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी संसाधन बचाकर रखना जरूरी है। उन्होंने ईश उपनिषद के शुरुआती मंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में भी प्रकृति और संसाधनों के सम्मान तथा संयमित इस्तेमाल की बात कही गई है। आज जब पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियां बढ़ रही हैं, तब इस सोच को अपने जीवन और काम का हिस्सा बनाने की जरूरत है। आर्च की फाउंडर अर्चना सुराणा ने कहा कि डिग्री मिलना उनके सफर का अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। अब उन्हें अपने ज्ञान और हुनर को वास्तविक जीवन में इस्तेमाल करना है। अपनी पहचान बनाने के साथ समाज और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाना भी उनके करियर का हिस्सा होना चाहिए।