शारीरिक कमजोरी के मामले में जाने माने मुंबई के डॉ. राजशेखर ब्रह्मभट्ट ने जयपुर में ‘गोल्डन अपॉर्च्युनिटी’ प्री-कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप में देशभर से आए सीनियर डॉक्टरों को मेडिसिन की क्लीनिकल प्रैक्टिस से जुड़ी जरूरी जानकारियां दीं। वहीं, चिकित्सकों और विशेषज्ञों का दो दिवसीय सम्मेलन राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC), जयपुर में शुरू हुआ। CSEPI की 42वीं वार्षिक कॉन्फ्रेंस हुई । डॉ. राजशेखर ब्रह्मभट्ट ने अपने 46 साल के अनुभव के आधार पर डॉक्टरों को डिस्फंक्शन के आकलन, काउंसलिंग और उपचार के व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी। वर्कशॉप का उद्देश्य डॉक्टरों को ऐसी जानकारी और तकनीक उपलब्ध कराना था, जिसका उपयोग वे अपनी रोजमर्रा की क्लीनिकल प्रैक्टिस में कर सकें। इसमें क्लीनिक शुरू करने, शारीरिक कमजोरी से जुड़े मिथकों और गलत धारणाओं और डिस्फंक्शन के सफल उपचार पर चर्चा हुई। डॉक्टरों को मरीजों की समस्याओं को व्यवस्थित तरीके से समझने और संवेदनशीलता के साथ उनसे बातचीत करने के तरीके भी बताए गए। हार्ड डिजीज का संकेत देता है इरेक्टाइल डिस्फंक्शन आयोजन सचिव और जयपुर के सेक्सोलॉजिस्ट डॉ. जॉली अरोड़ा ने बताया कि इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (ED) से हार्ट डिजीज के बारे का संकेत देता है। उन्होंने कहा कि ऐसे ईडी कई मामलों में हृदय संबंधी बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकता है। पेनिस की रक्त वाहिकाएं छोटी होने के कारण उनमें ब्लॉकेज की समस्या अन्य बड़ी रक्त वाहिकाओं से पहले सामने आ सकती है। ऐसे मरीजों में केवल ईडी का उपचार करने के बजाय हृदय स्वास्थ्य, लिपिड प्रोफाइल, खान-पान और एक्सरसाइज जैसी बातों का भी आकलन करना जरूरी हो सकता है। संकोच न करें, डॉक्टर के पास जाएं और सलाह लें आयोजन अध्यक्ष डॉ. एम.एन. थरेजा ने बताया कि हेल्थ से जुड़ी समस्याओं पर सामाजिक संकोच और गलत जानकारी के कारण लोग अक्सर डॉक्टर से सलाह लेने में झिझकते हैं। ऐसे में चिकित्सकों को वैज्ञानिक और साक्ष्य-आधारित जानकारी के साथ मरीजों की समस्याओं को समझना और उनका उचित मार्गदर्शन करना जरूरी है। 20 सितंबर तक होने वाले सम्मेलन में सेक्सोलॉजिस्ट, डर्मेटोलॉजिस्ट, यूरोलॉजिस्ट, साइकोलॉजिस्ट, गाइनकोलॉजिस्ट और फैमिली फिजिशियन सहित विभिन्न विशेषज्ञ सेक्सुअल हेल्थ से जुड़े विषयों पर चर्चा करेंगे।